मैहर जिले के चर्चित फर्जी बीपीएल कार्ड घोटाले की जांच तेज हो गई है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम शुक्रवार को दूसरी बार जनपद पंचायत कार्यालय पहुंची और पूरे दिन दस्तावेजों की गहन जांच कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए।
दूसरी बार जनपद पंचायत पहुंची EOW की टीम
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की चार सदस्यीय टीम शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे जनपद पंचायत मैहर पहुंची। टीम ने फर्जी बीपीएल कार्ड से जुड़े रिकॉर्ड, फाइलें और अन्य दस्तावेजों की जांच कर महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। कार्रवाई के दौरान पूरे दिन जनपद कार्यालय में हलचल बनी रही।
EOW के पुलिस अधीक्षक डॉ. अरविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि फर्जी बीपीएल कार्ड प्रकरण की विवेचना जारी है। जांच के दौरान आवश्यक दस्तावेजों और साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है ताकि मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा सके।
111 अपात्रों को मिला सरकारी योजनाओं का लाभ
EOW की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 से जनपद पंचायत मैहर में 111 अपात्र व्यक्तियों को फर्जी तरीके से बीपीएल सूची में शामिल कर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया गया। आरोप है कि पिछले करीब आठ वर्षों से ये लोग शासन की कई कल्याणकारी योजनाओं का फायदा उठाते रहे।
जांच में यह भी सामने आया कि बीपीएल कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में शासन के निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई।
एक शिकायत से खुला करोड़ों के लाभ का रास्ता
मामले की शुरुआत बीपीएल सूची के क्रमांक-1 पर दो अलग-अलग हितग्राहियों के नाम से कार्ड जारी होने की शिकायत से हुई थी। EOW ने जांच शुरू की तो एक के बाद एक कई अनियमितताएं सामने आती गईं। जांच में 111 अपात्र हितग्राही चिन्हित किए गए और कथित फर्जीवाड़े में अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई।
इन छह अधिकारियों पर दर्ज है मामला
फर्जी बीपीएल कार्ड जारी करने के मामले में छह अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इनमें तत्कालीन सीईओ वेदमणि मिश्रा, तत्कालीन सीईओ आर.एन. शर्मा, सहायक विकास विस्तार अधिकारी प्रेमलाल गौतम, बीडीओ सुदामा प्रसाद चौरसिया, तत्कालीन बीपीएल प्रभारी दीपक मिश्रा, वर्तमान बीपीएल प्रभारी रामसुंदर मिश्रा शामिल हैं।
जांच के बाद हो सकती है आगे की कार्रवाई
EOW द्वारा दस्तावेजों की दोबारा जांच से माना जा रहा है कि जांच अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। यदि दस्तावेजों से नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य जिम्मेदार अधिकारियों या संबंधित व्यक्तियों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।