सतना में RTO चेकपोस्ट बंद, फिर भी स्टॉपर लगाकर वसूली!

सतना। डिजिटल डेस्क

मध्य प्रदेश में पुरानी RTO चेकपोस्ट व्यवस्था बंद हुए दो साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन सतना जिले में चेकिंग के नाम पर वाहनों से कथित वसूली की शिकायतें अब भी सवाल खड़े कर रही हैं। मझगवां और नागौद तहसील के सिंहपुर क्षेत्र में पुराने चेकपोस्ट की जगह स्टॉपर लगाकर भारी वाहनों को रोकने और रूटीन चेकिंग के नाम पर कथित वसूली किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

सिंहपुर का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मार्ग उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले रास्तों से जुड़ता है और यहां से भारी वाहनों की आवाजाही होती है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि पुराने RTO बैरियर को सरकारी आदेश के बाद हटा दिया गया, लेकिन उसके बाद भी स्टॉपर लगाकर वाहनों को रोकने और चेकिंग के नाम पर रकम लेने की व्यवस्था कथित तौर पर जारी है।

1 जुलाई 2024 से बंद हैं पुराने RTO चेकपोस्ट

मध्य प्रदेश सरकार ने 30 जून 2024 के शासन आदेश के तहत प्रदेश के सभी परिवहन चेकपोस्ट को 1 जुलाई 2024 से बंद करने का फैसला लिया था। सरकार ने इसके पीछे परिवहन चेकपोस्टों पर पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और सुशासन का उद्देश्य बताया था। पुराने चेकपोस्ट की जगह रोड सेफ्टी एंड इंफोर्समेंट चेकिंग पॉइंट की व्यवस्था लागू की गई।

सरकार के मुताबिक चेकपोस्ट बंद होने का अर्थ वाहनों की जांच बंद करना नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रदेश में 45 रोड सेफ्टी एंड इंफोर्समेंट चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं।

बैरियर हटा, लेकिन स्टॉपर से रोकने का आरोप

स्थानीय जानकारी के मुताबिक सिंहपुर और मझगवां में पहले RTO का बैरियर हुआ करता था। शासन के आदेश के बाद पुरानी चेकपोस्ट व्यवस्था समाप्त होने पर यह बैरियर हटा दिया गया।

लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी सड़क पर स्टॉपर लगाकर भारी वाहनों को रोका जाता है। वाहनों की रूटीन चेकिंग के नाम पर प्रक्रिया चलाए जाने और इसी दौरान वाहन चालकों से कथित तौर पर रकम लिए जाने की शिकायत है।

सवाल यह है कि सिंहपुर और मझगवां में की जा रही चेकिंग किस अधिकृत चेकिंग पॉइंट या आदेश के तहत हो रही है और किसी वाहन से ली जाने वाली रकम का सरकारी रिकॉर्ड क्या है।

भारी वाहनों से कथित वसूली का तरीका क्या है

स्थानीय स्तर पर सामने आए आरोपों के मुताबिक सिंहपुर में मुख्य रूप से भारी वाहनों को चेकिंग के लिए रोका जाता है।

आरोप है कि रूटीन चेकिंग के दौरान वाहन को रोकने के बाद उसके कागजात, परमिट, टैक्स और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर वाहन चालकों से रकम लेने की बात कही जा रही है।

कुछ मामलों में यह भी आरोप है कि नियमित रूप से इस मार्ग से गुजरने वाले भारी वाहनों के लिए अलग व्यवस्था रहती है। वाहन के बार-बार आवागमन के आधार पर कथित तौर पर रकम तय होने और भुगतान के बाद वाहन को आगे जाने देने की बात सामने आई है।

सवाल यह कि रकम किस मद में ली जा रही है

अगर चेकिंग के दौरान किसी वाहन पर टैक्स, जुर्माना या शमन शुल्क बनता है तो उसकी वसूली संबंधित कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए।

मध्य प्रदेश विधानसभा में सरकार ने बताया है कि वाहनों पर मोटरयान कर की वसूली मध्य प्रदेश मोटरयान कराधान अधिनियम, 1991 के प्रावधानों के अनुसार की जाती है। वहीं नियम उल्लंघन की स्थिति में मोटरयान अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है।

ऐसे में सिंहपुर में कथित रूप से ली जा रही राशि को लेकर सबसे बड़ा सवाल है—क्या हर भुगतान के बदले सरकारी रसीद या चालान जारी किया जाता है?

अगर राशि सरकारी शुल्क है तो उसका रिकॉर्ड होना चाहिए। अगर कोई निजी टोकन, मौखिक हिसाब या बिना रसीद नकद भुगतान कराया जा रहा है, तो उसकी वैधानिकता की जांच जरूरी है।

सरकार की नई व्यवस्था में चेकिंग कैसे होनी है

पुरानी चेकपोस्ट व्यवस्था समाप्त करने के बाद सरकार ने रोड सेफ्टी एंड इंफोर्समेंट चेकिंग पॉइंट तथा मोबाइल यूनिट की व्यवस्था लागू की थी। आधिकारिक दस्तावेजों में बताया गया कि चेकिंग का उद्देश्य ओवरलोडिंग समेत मोटरयान अधिनियम और नियमों का पालन सुनिश्चित करना तथा पात्र मामलों में मोटरयान कर की वसूली करना है।

सरकार ने विधानसभा में यह भी बताया है कि चेकिंग पॉइंट पर वाहन रोकने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने की स्थिति में सीमित संख्या में वाहनों को रोककर जांच की जाती है और जाम से बचने का ध्यान रखा जाता है।

इसलिए किसी स्थान पर लगातार स्टॉपर लगाकर भारी वाहनों को रोकने की व्यवस्था है तो उसकी अधिकृत स्थिति और संचालन प्रक्रिया स्पष्ट होना जरूरी है।

UP बॉर्डर से जुड़े मार्ग होने के कारण बढ़ती है निगरानी की जरूरत

मझगवां तथा सिंहपुर क्षेत्र का मार्ग उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले रास्तों से जुड़ता है। ऐसे मार्गों पर दूसरे राज्यों से आने-जाने वाले मालवाहक वाहनों की आवाजाही रहती है।

यही वजह है कि यहां परिवहन विभाग की चेकिंग व्यवस्था स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण है। लेकिन चेकिंग के नाम पर किसी भी प्रकार की राशि लेने की प्रक्रिया कानून, अधिकृत शुल्क और सरकारी रिकॉर्ड के अनुरूप होनी चाहिए।

यदि किसी वाहन से निर्धारित टैक्स या दंड लिया जाता है तो वाहन चालक को उसकी वैधानिक जानकारी और भुगतान का प्रमाण मिलना चाहिए।

निजी लोगों की मौजूदगी हो तो भी जांच जरूरी

मामले में यदि विभागीय चेकिंग के दौरान निजी व्यक्ति भी वाहन रोकने या रकम लेने की भूमिका में हैं, तो यह अलग से जांच का विषय होगा।

किसी निजी व्यक्ति को सरकारी शुल्क लेने, वाहन रोकने या विभागीय कार्रवाई करने का अधिकार किस आदेश से मिला है—इसका रिकॉर्ड सामने आना चाहिए।

विभाग से इन सवालों के जवाब जरूरी

परिवहन विभाग से मुख्य रूप से यह जानकारी सामने आनी चाहिए—

  1. मझगवां और सिंहपुर में वर्तमान में कौन-सा RTO चेकिंग पॉइंट अधिकृत है
  2. वहां स्टॉपर लगाकर वाहनों को रोकने का आदेश किस अधिकारी ने दिया
  3. वहां किस अधिकारी और कितने कर्मचारियों की ड्यूटी है
  4. भारी वाहनों की चेकिंग का रिकॉर्ड किस सिस्टम में दर्ज होता है
  5. वाहन चालकों से ली जाने वाली राशि किस मद में जमा होती है
  6. क्या प्रत्येक भुगतान पर सरकारी रसीद या ऑनलाइन चालान जारी होता है
  7. क्या किसी निजी व्यक्ति को वाहन रोकने या राशि लेने की अनुमति है
  8. नियमित भारी वाहनों से किसी प्रकार की मासिक राशि या टोकन व्यवस्था अधिकृत है या नहीं

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