सबसे बड़े नक्सली नेटवर्क पर बड़ा वार: 2.20 करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा गिरफ्तार, 46 साल का खूनी साम्राज्य ढहा

करीब चार दशक से अधिक समय तक नक्सली हिंसा का चेहरा रहे CPI (माओवादी) के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां भारत के सबसे बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन में से एक मान रही हैं। झारखंड में हुए ‘ऑपरेशन दौरा पहाड़’ ने न केवल संगठन के शीर्ष नेतृत्व को झटका दिया है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि इससे नक्सली नेटवर्क का केंद्रीय ढांचा लगभग ध्वस्त हो गया है।

कौन है मिसिर बेसरा, जिसे देश का सबसे बड़ा नक्सली माना जाता था

65 वर्षीय मिसिर बेसरा, जिसे सागर दा और भास्कर दा के नाम से भी जाना जाता है, झारखंड के गिरिडीह जिले का रहने वाला है। वह 1980 में माओवादी संगठन से जुड़ा और 2003 में सेंट्रल कमेटी का सदस्य बना। बाद में वह संगठन के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले पोलित ब्यूरो तक पहुंचा। पुलिस के अनुसार वह लंबे समय से झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में नक्सली नेटवर्क खड़ा करने और उसे संचालित करने में अहम भूमिका निभा रहा था।

कैसे हुआ ऑपरेशन दौरा पहाड़

झारखंड पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों ने लंबे समय तक निगरानी और सटीक इनपुट के आधार पर धनबाद जिले के मनियाडीह क्षेत्र में ‘ऑपरेशन दौरा पहाड़’ चलाया। सुरक्षा बलों ने बिना गोली चले मिसिर बेसरा को उसके साथियों सहित गिरफ्तार कर लिया। इस ऑपरेशन को इसलिए भी बड़ी सफलता माना जा रहा है क्योंकि इतने बड़े माओवादी नेता को जीवित पकड़ना बेहद दुर्लभ माना जाता है।

2.20 करोड़ का इनाम, 175 से ज्यादा केस

मिसिर बेसरा पर झारखंड और ओडिशा सरकार की ओर से कुल 2.20 करोड़ का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 175 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस के अनुसार हत्या, IED विस्फोट, हथियार लूट, सुरक्षाबलों पर हमले, बैंक डकैती और रंगदारी जैसे गंभीर मामलों में उसका नाम शामिल रहा है।

100 से ज्यादा जवानों की मौत का आरोपी

झारखंड पुलिस के आईजी (ऑपरेशन) नरेंद्र सिंह के अनुसार मिसिर बेसरा और उसके सहयोगी वर्षों में कई बड़े नक्सली हमलों के मास्टरमाइंड रहे। इनमें 2005 का जहानाबाद जेल ब्रेक, हथियार लूट, IED हमले और सुरक्षाबलों पर कई घातक हमले शामिल हैं। अधिकारियों का दावा है कि इनके नेटवर्क की हिंसा में 100 से अधिक सुरक्षा कर्मियों की जान गई।

पुलिस ने क्यों कहा ‘ऐतिहासिक सफलता’

झारखंड की डीजीपी तडाशा मिश्रा ने कहा कि मिसिर बेसरा CPI (माओवादी) का एकमात्र सक्रिय शीर्ष पोलित ब्यूरो सदस्य था। उनके अनुसार उसकी गिरफ्तारी के बाद राज्य में नक्सली नेटवर्क ‘लगभग समाप्त’ होने की स्थिति में पहुंच गया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ से संगठन के फंडिंग नेटवर्क, हथियार आपूर्ति, ठिकानों और शेष कैडर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

आत्मसमर्पण की बढ़ी रफ्तार

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के आसपास ही झारखंड में 16 माओवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया। वहीं छत्तीसगढ़ के बीजापुर में भी इनामी नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबर सामने आई। हालांकि अधिकारियों ने इन घटनाओं को सीधे तौर पर मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से जोड़कर पुष्टि नहीं की है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अब अभियान का अगला लक्ष्य संगठन के बचे हुए सक्रिय नेताओं और कैडर को पकड़ना है। पुलिस का दावा है कि झारखंड में सक्रिय बचे नक्सलियों की संख्या अब काफी सीमित रह गई है और आने वाले दिनों में अभियान और तेज किया जाएगा।

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