भोपाल। डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश में खेती के साथ पशुपालन और डेयरी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार बनाने की तैयारी है। सरकार ने प्रदेश को Milk Capital बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए दूध उत्पादन बढ़ाने से लेकर गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ने, दूध संग्रहण और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने तक कई स्तरों पर काम किया जा रहा है।
2028 तक Milk Capital बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को Milk Capital of India बनाने का लक्ष्य रखा है। सरकार का जोर केवल दूध उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गांव से लेकर बाजार तक पूरी डेयरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर है।
सरकार के डेयरी विकास प्लान में दूध संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, मार्केटिंग और सहकारी नेटवर्क को विस्तार देने की योजना शामिल है। अप्रैल 2025 में सरकार ने करीब 1,450 करोड़ रुपये के डेयरी डेवलपमेंट प्लान और दूध संग्रहण को दोगुना करने की दिशा में काम शुरू होने की जानकारी दी थी।
26 हजार गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी
सरकार के सामने अब डेयरी नेटवर्क को प्रदेश के 26 हजार गांवों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई डेयरी फेडरेशन की बैठक में इस लक्ष्य के साथ रोजाना 52 लाख किलोग्राम दूध संग्रहण तक पहुंचने की योजना बताई गई।
इसका सीधा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को मिल सकता है। गांव के स्तर पर दूध का संग्रहण और शीतलीकरण बढ़ने से किसानों को स्थानीय स्तर पर दूध बेचने के लिए बेहतर नेटवर्क मिल सकेगा।
दूध संग्रहण पहले ही 10 लाख किलो से ज्यादा
सरकार के मुताबिक डेयरी क्षेत्र में शुरुआती स्तर पर भी विस्तार हुआ है। 2026 में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 1,752 नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित की गई हैं।
दूध का रोजाना संग्रहण 10 लाख किलोग्राम से अधिक पहुंचने और दूध उत्पादक किसानों को 1,600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किए जाने की जानकारी भी दी गई है। सरकार के अनुसार किसानों को दूध का दाम पहले की तुलना में करीब 8 से 10 रुपये प्रति किलो अधिक मिल रहा है।
दुग्ध समितियों की संख्या बढ़ाने का प्लान
डेयरी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सरकार ने सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है। 2025 में सरकार ने दुग्ध सहकारी समितियों को 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार करने का लक्ष्य बताया था।
इसके साथ करीब 18 हजार गांवों के दुग्ध उत्पादकों को सहकारी डेयरी नेटवर्क से जोड़ने और गांवों में दूध ठंडा करने की सुविधाएं विकसित करने की योजना भी सामने रखी गई थी।
गांव में ही दूध की जांच और कलेक्शन
Milk Capital के लक्ष्य में केवल पशुओं की संख्या बढ़ाना ही शामिल नहीं है। सरकार दूध की गुणवत्ता और संग्रहण व्यवस्था को भी मजबूत करना चाहती है।
इसके लिए ग्राम स्तर पर दूध शीतलीकरण क्षमता बढ़ाने, हाईटेक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने और दूध की गुणवत्ता जांच की व्यवस्था को मजबूत करने की योजना है। सरकार ने डेयरी नेटवर्क को हाईटेक बनाने के लिए NDDB के तकनीकी सहयोग का भी उल्लेख किया है।
कामधेनु योजना से डेयरी यूनिट को बढ़ावा
डेयरी विस्तार में डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना भी महत्वपूर्ण है। योजना के तहत 25 दुधारू गाय या भैंस की यूनिट स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का उद्देश्य ऐसी डेयरी यूनिट को बढ़ावा देना है, जिससे किसान पशुपालन को व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में अपना सकें और दूध उत्पादन बढ़ाया जा सके।
‘दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान’ से पशुपालकों तक पहुंचेगी सरकार
सरकार ने पशुपालकों तक योजनाओं और तकनीकी जानकारी पहुंचाने के लिए दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान भी चलाया है।
अभियान में पशुपालकों को पशु पोषण, स्वास्थ्य, नस्ल सुधार, टीकाकरण और टैगिंग जैसी जानकारी देने का प्रावधान है। 2026 में इसके तीसरे चरण की तैयारी की जानकारी सरकार ने दी थी।
‘क्षीरधारा ग्राम’ से गांवों में बढ़ेगा दूध उत्पादन
कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत क्षीरधारा ग्राम योजना शुरू की गई है। पहले चरण में 5 हजार से अधिक गांवों को चुने जाने की जानकारी दी गई है।
इस योजना में गांवों को पशुपालन, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और टैगिंग जैसी व्यवस्थाओं के आधार पर विकसित करने पर जोर है। उद्देश्य गांव के स्तर पर दूध उत्पादन को बढ़ाना और बेहतर पशुपालन के लिए किसानों को तैयार करना है।
सिर्फ दूध नहीं, पूरी Dairy Value Chain पर फोकस
सरकार का प्लान दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है। दूध को प्रोसेस कर दही, पनीर, दूध पाउडर और अन्य उत्पादों के रूप में बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर है।
2025 में सरकार ने दुग्ध संघों के कारोबार को बढ़ाने, हाईटेक प्रोसेसिंग प्लांट लगाने और पैकेट दूध की बिक्री बढ़ाने का लक्ष्य बताया था। इसके साथ ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
सांची ब्रांड को बनाया जाएगा मजबूत
डेयरी उत्पादों के बाजार में सांची ब्रांड को मजबूत करना भी सरकार की रणनीति का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा था कि सांची ब्रांड को आगे बढ़ाया जाएगा और सहकारिता के माध्यम से डेयरी नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
इसका मकसद स्थानीय स्तर पर संग्रहित दूध को संगठित बाजार और प्रोसेसिंग नेटवर्क से जोड़ना है।
पशुपालकों की आय बढ़ाना है बड़ा लक्ष्य
सरकार डेयरी विस्तार को किसानों की आय बढ़ाने से जोड़ रही है। खेती के साथ दूध उत्पादन होने से किसानों के पास रोजाना या नियमित आय का एक अतिरिक्त स्रोत बन सकता है।
इसी वजह से पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार, बेहतर चारा, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और पशुपालकों को प्रशिक्षण देने जैसी गतिविधियों को भी डेयरी प्लान का हिस्सा बनाया गया है।
क्या MP सच में बन सकता है Milk Capital
सरकार के सामने लक्ष्य बड़ा है। इसके लिए सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। गांवों में कलेक्शन सेंटर, चिलिंग नेटवर्क, पशु स्वास्थ्य सेवाएं, गुणवत्तापूर्ण चारा, नस्ल सुधार, प्रोसेसिंग प्लांट और मजबूत बाजार व्यवस्था को एक साथ आगे बढ़ाना होगा।
सरकार की मौजूदा योजना इसी पूरी चेन को मजबूत करने पर केंद्रित दिखाई देती है। आने वाले वर्षों में 26 हजार गांवों का नेटवर्क और 52 लाख किलो प्रतिदिन दूध संग्रहण जैसे लक्ष्य इस अभियान की सफलता के महत्वपूर्ण पैमाने होंगे।
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