नालंदा। डिजिटल डेस्क
बिहार के नालंदा जिले के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मंगलवार, 18 अगस्त को नूरसराय के परासी मध्य विद्यालय में बच्चों को परोसी गई सब्जी में नमक की जगह कथित तौर पर डिटर्जेंट पाउडर मिला दिया गया। खाना खाने के बाद करीब 40 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई।
खाने में नमक कम लगा तो मांगा था अतिरिक्त नमक
मामला नूरसराय थाना क्षेत्र के परासी मध्य विद्यालय का है। मंगलवार को स्कूल में बच्चों को निर्धारित मेन्यू के तहत चावल और सोयाबीन की सब्जी परोसी गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, पहली पंगत के बाद दूसरी पंगत में भोजन कर रहे बच्चों ने सब्जी में नमक कम होने की शिकायत की और अतिरिक्त नमक मांगा। इसी दौरान कथित तौर पर नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर वाला डिब्बा उठा लिया गया।
नमक की जगह कैसे पहुंचा डिटर्जेंट पाउडर
स्कूल के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, विद्यालय में मिड-डे मील एक एनजीओ के माध्यम से पहुंचता है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि रसोई में नमक और डिटर्जेंट पाउडर के डिब्बे पास-पास रखे थे।
इसी वजह से गलती से डिटर्जेंट पाउडर को नमक समझकर सब्जी में डाल दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
खाना खाने के बाद बच्चों की बिगड़ी तबीयत
डिटर्जेंट मिला भोजन खाने के कुछ समय बाद बच्चों को परेशानी होने लगी। कई बच्चों ने उल्टी, पेट दर्द, चक्कर और गले में जलन जैसी शिकायत की।
स्थिति बिगड़ने पर स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। अलग-अलग रिपोर्टों में बीमार बच्चों की संख्या अलग बताई गई है, लेकिन ताजा रिपोर्टों में करीब 40 बच्चों के बीमार होने की जानकारी दी गई है।
अस्पताल में कराया गया इलाज
बीमार बच्चों को इलाज के लिए बिहारशरीफ के अस्पताल ले जाया गया। नालंदा के सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने बच्चों की स्थिति की जानकारी ली। रिपोर्टों के मुताबिक बच्चों की हालत स्थिर बताई गई है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया गया।
मंत्री ने अस्पताल पहुंचकर जाना हाल
घटना की जानकारी मिलने के बाद बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने भर्ती बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात कर स्वास्थ्य की जानकारी ली। मंत्री ने मामले में जांच कराने और लापरवाही सामने आने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है।
भोजन के नमूने की जांच होगी
घटना के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जांच शुरू की गई है। मिड-डे मील के भोजन के नमूने जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच में यह देखा जाएगा कि डिटर्जेंट पाउडर भोजन में किस स्तर पर मिला, रसोई में खाद्य सामग्री और सफाई सामग्री को किस तरह रखा गया था और बच्चों को भोजन परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं हुई।
मिड-डे मील की निगरानी पर सवाल
इस घटना ने स्कूलों में मिड-डे मील की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। भोजन तैयार करने वाली जगह पर खाने की सामग्री और सफाई में इस्तेमाल होने वाले डिटर्जेंट को अलग रखना बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है।
इसके अलावा बच्चों को खाना परोसने से पहले भोजन की गुणवत्ता और सामग्री की जांच की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
बच्चों की सुरक्षा पर प्रशासन के सामने चुनौती
मिड-डे मील स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए पोषण का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में भोजन में डिटर्जेंट पाउडर पहुंचने जैसी घटना को महज गलती मानकर छोड़ना पर्याप्त नहीं होगा।
जांच के बाद जिम्मेदारी तय होने के साथ-साथ ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए स्कूलों में खाद्य सामग्री के भंडारण और भोजन परोसने की प्रक्रिया की निगरानी मजबूत करने की जरूरत होगी।