उज्जैन। डिजिटल डेस्क
धार्मिक नगरी उज्जैन में नाग पंचमी के अवसर पर साल में केवल एक बार खुलने वाले भगवान श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट रविवार मध्यरात्रि 12 बजे विधि-विधान के साथ खोल दिए गए। पट खुलने के बाद भगवान नागचंद्रेश्वर की विशेष पूजा-अर्चना की गई और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। इस बार नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का विशेष संयोग होने से महाकाल की नगरी में आस्था का सैलाब उमड़ा है।
साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं मंदिर के पट
भगवान श्री नागचंद्रेश्वर का मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष तल पर स्थित है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मंदिर के पट सामान्य दिनों में बंद रहते हैं और केवल नाग पंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। उज्जैन जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा के दर्शन केवल नाग पंचमी के दिन उपलब्ध होते हैं।
2026 में मंदिर के पट 16 अगस्त की रात 12 बजे खोले गए और 17 अगस्त की रात 12 बजे तक दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा। इसके बाद मंदिर के पट अगले नाग पंचमी पर्व तक बंद कर दिए जाएंगे।
पट खुलते ही हुई विशेष पूजा-अर्चना
परंपरा के अनुसार पट खुलने के बाद भगवान नागचंद्रेश्वर की विशेष पूजा की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई। उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि नाग पंचमी के दिन श्रद्धालुओं को वर्ष में केवल 24 घंटे भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन का अवसर मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं का पालन करने की अपील की।
नागचंद्रेश्वर मंदिर में नाग पंचमी के अवसर पर त्रिकाल पूजा की परंपरा है। मध्यरात्रि में पहली पूजा के बाद दोपहर में शासकीय पूजा और शाम को महाकाल मंदिर के पुजारी-पुरोहितों द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है।
नाग पंचमी और सावन सोमवार का विशेष संयोग
इस वर्ष नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026, सोमवार को है। इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार भी है। इसके साथ भगवान महाकाल की तीसरी सवारी भी निकलेगी।
नाग पंचमी और सावन सोमवार का यह संयोग श्रद्धालुओं के लिए विशेष माना जा रहा है। एक ओर भक्तों को साल में एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन भी किए जा रहे हैं।
दुर्लभ प्रतिमा है मंदिर की खास पहचान
नागचंद्रेश्वर मंदिर में स्थापित प्रतिमा को इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में गिना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार यह प्रतिमा 11वीं शताब्दी की मानी जाती है।
प्रतिमा में भगवान शिव और माता पार्वती नाग के फनों के नीचे विराजमान दिखाई देते हैं। भगवान शिव के साथ नाग का विशेष स्वरूप इस प्रतिमा को अन्य शिव मंदिरों से अलग पहचान देता है।
उज्जैन जिला प्रशासन भी नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा को महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित विशेष धार्मिक धरोहर के रूप में दर्ज करता है।
नागराज तक्षक से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
नागचंद्रेश्वर मंदिर को लेकर नागराज तक्षक से जुड़ी धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार नागराज तक्षक ने भगवान शिव की आराधना की थी और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के बाद उन्हें अपने सानिध्य में स्थान मिला।
इसी धार्मिक परंपरा के कारण नाग पंचमी के दिन नागचंद्रेश्वर के दर्शन को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि तक्षक से जुड़ी ये बातें धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं हैं, ऐतिहासिक तथ्य के रूप में इन्हें प्रमाणित नहीं माना जाना चाहिए।
दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था
नाग पंचमी और सावन सोमवार एक ही दिन होने के कारण उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ गई है। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
नागचंद्रेश्वर मंदिर में शीघ्र दर्शन के लिए ₹300 की व्यवस्था और 11 स्लॉट की जानकारी भी सामने आई है। इसके लिए प्रवेश गेट नंबर 5 से निर्धारित किया गया था और मोबाइल फोन को मंदिर परिसर में ले जाने की अनुमति नहीं होने की जानकारी दी गई है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अलग-अलग मार्ग और प्रवेश व्यवस्था भी निर्धारित की है। नागचंद्रेश्वर दर्शन और बाबा महाकाल की सवारी के मार्गों को अलग रखने की तैयारी की गई है।
लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
इस विशेष अवसर को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान लगाया था। पहले से ही सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारी की गई थी।
महाकाल मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। भारी भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं से लगातार प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने और कतार में धैर्य बनाए रखने की अपील की जा रही है।
महाकाल की तीसरी सवारी भी आज
17 अगस्त को नाग पंचमी के साथ सावन का तीसरा सोमवार होने के कारण बाबा महाकाल की तीसरी सवारी भी निकलेगी। सावन-भादौ 2026 में महाकाल की सवारियों का क्रम 3 अगस्त से शुरू हुआ था और तीसरी सवारी 17 अगस्त को निर्धारित है।
इस वजह से उज्जैन में धार्मिक गतिविधियां और श्रद्धालुओं की भीड़ दोनों एक साथ बढ़ गई हैं। प्रशासन के सामने नागचंद्रेश्वर दर्शन और महाकाल सवारी, दोनों के लिए सुचारु व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।
आज रात फिर बंद हो जाएंगे पट
नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट 16 अगस्त की मध्यरात्रि में खुलने के बाद 17 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे तक खुले रहेंगे। 24 घंटे की दर्शन अवधि पूरी होने के बाद मंदिर के पट फिर बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं को अगले नाग पंचमी पर्व तक भगवान नागचंद्रेश्वर के नियमित दर्शन उपलब्ध नहीं होंगे।