मध्य प्रदेश के पांढुर्ना जिले में कृषि विभाग ने अवैध रूप से खाद, बीज और कीटनाशकों के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई की है। ग्राम मरकावाड़ा में छापेमारी के दौरान बिना लाइसेंस भारी मात्रा में कृषि आदान, संदिग्ध नकली उत्पाद और अन्य सामग्री बरामद हुई। विभाग ने पूरा स्टॉक जब्त कर मकान को सील कर दिया है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
शिकायत के बाद हुई छापेमारी
जानकारी के अनुसार कृषि विभाग को काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं कि ग्राम मरकावाड़ा निवासी परमेश्वर जगन बारंगे अपने मकान से बिना लाइसेंस खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों का भंडारण एवं विक्रय कर रहे हैं। शिकायतों के सत्यापन के बाद विभाग ने विशेष टीम गठित कर छापेमारी की। कार्रवाई का नेतृत्व अनुविभागीय कृषि अधिकारी सौसर अर्चना डोंगरे ने किया। टीम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विनोद लोखंडे, कृषि विस्तार अधिकारी सुनील गजभिए, नितिन डेहरिया, राहुल सरयाम सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।
भारी मात्रा में खाद, बीज और कीटनाशक बरामद

तलाशी के दौरान मकान के विभिन्न हिस्सों से बड़ी मात्रा में रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, शाकनाशी, फफूंदनाशक तथा जैविक उत्पाद बरामद किए गए। जांच के दौरान अधिकारियों को कुछ ऐसे कृषि आदान भी मिले, जिन पर प्रथम दृष्टया संदेह जताया गया कि वे नकली अथवा संदिग्ध हो सकते हैं। विभाग ने सभी संदिग्ध उत्पादों के नमूने जांच के लिए सुरक्षित कर लिए हैं। मौके पर मौजूद पूरे स्टॉक का पंचनामा बनाकर जब्ती की कार्रवाई की गई और मकान को सील कर दिया गया।
बिना लाइसेंस कारोबार को बताया गंभीर उल्लंघन
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिना लाइसेंस कृषि आदानों का भंडारण और बिक्री कृषि संबंधी कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में नकली या अमानक कृषि आदानों की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
तीन बड़ी दुकानों की सप्लाई पर भी उठे सवाल
मरकावाड़ा में हुई कार्रवाई के बाद पांढुर्ना शहर की तीन बड़ी खाद-बीज दुकानों की भी चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि बरामद खाद, बीज और कीटनाशकों की सप्लाई इन्हीं प्रतिष्ठानों से की गई थी। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि जांच में ऐसे तथ्य सामने आते हैं तो विभाग बड़े व्यापारिक नेटवर्क तक भी कार्रवाई का दायरा बढ़ा सकता है।
विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
कार्रवाई के बाद कृषि विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे स्तर पर कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन लंबे समय से अवैध कारोबार करने वाले बड़े व्यापारियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि कार्रवाई के बाद विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी अवकाश पर चले गए और पूरे मामले पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से बचते रहे। हालांकि इन आरोपों पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली या अमानक खाद, बीज और कीटनाशकों का उपयोग किसानों की फसल उत्पादन, मिट्टी की गुणवत्ता और आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे में कृषि विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराना और अवैध कारोबार पर रोक लगाना है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि बरामद सामग्री में कितने उत्पाद मानक के अनुरूप हैं और किनके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई होगी।