देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों और छात्रों के बढ़ते विरोध के बीच केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार मौजूदा एंटी-पेपर लीक कानून को और सख्त बनाने जा रही है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत दोषियों को अधिक जेल, अधिक जुर्माना और मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्था लागू की जा सकती है।
क्यों लाने पड़ रहे हैं नए बदलाव
पिछले कुछ वर्षों में NEET, भर्ती परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक के कई मामले सामने आए। इससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ और कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। हालिया NEET-UG विवाद के बाद छात्रों के विरोध और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग ने सरकार पर कानून को और प्रभावी बनाने का दबाव बढ़ाया।
मौजूदा कानून क्या कहता है
फिलहाल Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू है। इस कानून के तहत संगठित पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों में 5 से 10 साल तक की सजा और न्यूनतम 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
नए बिल में क्या हो सकते हैं बड़े बदलाव
सरकारी सूत्रों के अनुसार सरकार मौजूदा कानून में कई महत्वपूर्ण संशोधन करने की तैयारी में है। इनमें प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं—
- पेपर लीक से जुड़े मामलों में जेल की सजा और अधिक सख्त की जा सकती है।
- आर्थिक दंड (जुर्माना) बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
- मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे।
- जांच और अभियोजन की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाएगा।
- संगठित गिरोह, बिचौलियों और नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए अतिरिक्त कानूनी प्रावधान जोड़े जा सकते हैं।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट से क्या होगा फायदा
सरकार का मानना है कि पेपर लीक के कई मामलों में वर्षों तक मुकदमे लंबित रहने से अपराधियों में डर नहीं बन पाता। फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनने से ऐसे मामलों की सुनवाई तेजी से होगी और दोषियों को कम समय में सजा मिल सकेगी। इससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने घोषणा की कि पेपर लीक मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करेंगे, उन्हें किसी भी हाल में नहीं छोड़ा जाएगा।
किन परीक्षाओं पर लागू होता है यह कानून
यह कानून केंद्र सरकार द्वारा आयोजित या अधिसूचित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है। इनमें UPSC, SSC, NTA की प्रमुख परीक्षाएं, रेलवे भर्ती सहित अन्य केंद्रीय भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं शामिल हैं। राज्यों की परीक्षाओं पर संबंधित राज्य अपने कानूनों के अनुसार कार्रवाई करते हैं।
छात्रों पर क्या पड़ेगा असर
यदि प्रस्तावित संशोधन लागू होते हैं तो पेपर लीक के मामलों में कानूनी कार्रवाई और तेज होगी। सरकार का दावा है कि इससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, संगठित गिरोहों पर अंकुश लगेगा और ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा। हालांकि अंतिम प्रावधान संसद में पेश होने वाले विधेयक के बाद ही स्पष्ट होंगे।