पांढुर्ना। डिजिटल डेस्क
जाम नदी के तट पर शुक्रवार को सदियों पुरानी परंपरा वाला गोटमार मेला संपन्न हो गया। पांढुर्ना और सावरगांव के लोगों के बीच दिनभर जमकर पत्थरबाजी हुई। इस दौरान 1100 से अधिक लोग घायल हुए, जबकि 12 गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद नागपुर रेफर किया गया।
छह बजे टूटा झंडा, पांढुर्ना की जीत
मेले की शुरुआत सुबह मां चंडीका के पूजन के साथ हुई। इसके बाद पांढुर्ना और सावरगांव के लोग जाम नदी के दोनों किनारों पर जुटे और परंपरागत गोटमार शुरू हुई। दिनभर दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर पत्थर बरसाए गए।
शाम करीब छह बजे पांढुर्ना की ओर से प्रज्वल तुमड़ाम पेंढोनी ने झंडा तोड़ा। परंपरा के अनुसार पलाश के पेड़ को बाद में मां चंडीका मंदिर में अर्पित किया गया।
1100 से ज्यादा घायल, 12 नागपुर रेफर
पत्थरबाजी के दौरान 1100 से अधिक लोग घायल हुए। इनमें 12 गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद नागपुर रेफर किया गया, जबकि 40 से अधिक घायलों का उपचार सिविल अस्पताल में जारी रहा।
घायलों के उपचार के लिए मेला क्षेत्र में 7 अस्थाई अस्पताल बनाए गए थे। यहां 44 डॉक्टरों समेत करीब 200 स्वास्थ्यकर्मियों की टीम तैनात रही। गंभीर मरीजों को रेफर करने के लिए 22 एंबुलेंस भी उपलब्ध कराई गई थीं।
700 पुलिसकर्मी और ड्रोन से निगरानी
मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 700 पुलिस जवान तैनात किए गए थे। मेला क्षेत्र में 10 सीसीटीवी कैमरों और 3 ड्रोन के जरिए निगरानी की गई। नदी में किसी तरह की अप्रिय घटना रोकने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए थे।
कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ और एसपी प्रकाश चंद्र परिहार समेत प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पूरे समय मेला क्षेत्र में मौजूद रहे और कंट्रोल रूम से व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।
प्रतिबंध के बावजूद चलीं गोफन
प्रशासन ने धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर हथियार रखने और प्रदर्शन करने समेत कुछ गतिविधियों पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद मेले में कई लोगों के गोफन चलाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
क्षेत्रीय विधायक नीलेश उईके भी मेले में शामिल हुए और परंपरा निभाई। उन्होंने गोटमार मेले को क्षेत्र की परंपरा और आस्था का प्रतीक बताया।