पन्ना की धरती एक बार फिर हीरे की चमक से रोशन हुई है। निजी खेत में संचालित उथली हीरा खदान की पुरानी चाल से ऐसा नायाब रत्न मिला, जिसने खदान संचालक की किस्मत बदल दी। मामला पन्ना जिले के सरकोहा गांव का है। यहां नारंगीबाग निवासी 40 वर्षीय अखिलेश पाल अपने पिता गनेश प्रसाद पाल के नाम दर्ज खेत में उथली हीरा खदान संचालित कर रहे हैं।
अखिलेश ने बताया कि करीब दो साल पहले हीरा कार्यालय से खदान के लिए पट्टा मिला था। इसके बाद उन्होंने अपने सहयोगियों संतोष कुशवाहा, सरमन पाल, जमुना पाल, मोना रावत और हेमचंद्र पाल के साथ मिलकर खुदाई शुरू की। खदान से निकलने वाली चालों की पहले धुलाई कराई गई थी। लेकिन बाद में बची हुई कुछ चालों में सफलता नहीं मिलने पर उन्हें खदान के पास ही छोड़ दिया गया था।
चमकीला कण दिखा तो हुआ हीरे का शक
अखिलेश सोमवार 10 अगस्त को बारिश के बाद वह खदान के पास छोड़ी गई पुरानी चाल को देखने पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी नजर एक चमकीले पत्थर जैसे कण पर पड़ी। संदेह होने पर उन्होंने इसकी जांच कराई। जांच के बाद पता चला कि यह साधारण पत्थर नहीं बल्कि जेम-क्वॉलिटी हीरा है।
हीरे का वजन सामने आने के बाद खदान संचालक की खुशी और बढ़ गई। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी अनुमानित कीमत 50 से 80 लाख रुपये के बीच हो सकती है।
16.96 कैरेट का है जेम-क्वॉलिटी हीरा
मंगलवार 11 अगस्त को अखिलेश पाल ने हीरे को पन्ना जिला कलेक्टरेट स्थित हीरा विभाग कार्यालय में जमा कराया। हीरा कार्यालय के पारखी अनुपम सिंह ने हीरे की जांच के बाद इसका वजन 16.96 कैरेट होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि हीरा जेम-क्वॉलिटी का है और इसे नियमानुसार जमा कर लिया गया है। अब इस हीरे को आगामी नीलामी में रखा जाएगा। नीलामी में मिलने वाली सबसे ऊंची बोली के आधार पर इसकी बिक्री होगी।
नीलामी के बाद मिलेगी रकम
हीरा कार्यालय के अनुसार नीलामी से प्राप्त राशि में से शासन की निर्धारित रॉयल्टी काटी जाएगी। इसके बाद बची हुई रकम नियमानुसार खदान संचालक को दी जाएगी।
यानी अब अखिलेश पाल और उनके सहयोगियों की नजर आगामी नीलामी पर है। अगर हीरे को अच्छी बोली मिलती है, तो यह खोज उनके लिए बड़ी आर्थिक सफलता साबित हो सकती है।
पन्ना की धरती फिर बनी किस्मत बदलने वाली
पन्ना को देश-दुनिया में हीरों की धरती के रूप में जाना जाता है। यहां अक्सर मेहनत और किस्मत के मेल से छोटे-बड़े हीरे लोगों की जिंदगी बदल देते हैं।
सरकोहा की इस खदान में मिला 16.96 कैरेट का जेम-क्वॉलिटी हीरा भी इसी कहानी की एक नई कड़ी है। खास बात यह है कि यह हीरा किसी नई चाल से नहीं, बल्कि पहले से छोड़ी गई चाल में बारिश के बाद मिला।