अवैध शराब पर दबिश देने पहुंची आबकारी टीम पर हमला, पत्थरबाजी में सरकारी वाहन का शीशा टूटा; 3 पर FIR

सतना। डिजिटल डेस्क

रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र के जमुना गांव में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची आबकारी टीम पर कथित तौर पर हमला कर दिया गया। टीम ने एक दुकान से 48 पाव अंग्रेजी शराब बरामद की थी। कार्रवाई के दौरान विवाद बढ़ा तो आरोपियों ने टीम से मारपीट का प्रयास किया और वापस लौट रहे शासकीय वाहन पर पत्थर बरसा दिए। घटना में वाहन का पिछला शीशा टूट गया।

दुकान की तलाशी में मिली 48 पाव शराब

पुलिस के मुताबिक, सतना सर्किल-1 ग्रामीण के प्रभारी सुदर्शन विक्रमादित्य पांडेय को शुक्रवार शाम मुखबिर से जमुना गांव में अवैध शराब बिक्री की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर आबकारी टीम ने लवकुश सिंह पटेल की दुकान पर दबिश देकर तलाशी ली।

तलाशी के दौरान एक पेटी में 48 पाव अंग्रेजी शराब बरामद हुई। आबकारी टीम ने जब शराब के संबंध में लवकुश से पूछताछ की तो मामला विवाद में बदल गया।

पूछताछ के दौरान बुलाए दो साथी

आरोप है कि जवाब देने के बजाय लवकुश सिंह पटेल आबकारी टीम से विवाद करने लगा। इसके बाद उसने अपने दो साथियों हरिओम सिंह और मूरत साकेत को मौके पर बुला लिया। तीनों पर आबकारी टीम के साथ मारपीट पर आमादा होने का आरोप है।

मौके पर भीड़ बढ़ती देख आबकारी टीम ने वहां से निकलने का फैसला किया और अपने शासकीय वाहन से वापस लौटने लगी।

जाते समय वाहन पर बरसाए पत्थर

आबकारी टीम के मुताबिक, जैसे ही टीम मौके से रवाना हुई, आरोपियों ने वाहन पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। पत्थरबाजी में आबकारी विभाग की कार क्रमांक एमपी 19 जेडएल 5648 का पिछला शीशा चकनाचूर हो गया।

घटना के बाद टीम किसी तरह वहां से वापस लौटी और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। विवाद और पत्थरबाजी का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है।

रात में थाने पहुंची टीम, तीन पर केस

घटना के बाद आबकारी टीम ने रात में ही रामपुर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। सर्किल प्रभारी की शिकायत पर पुलिस ने लवकुश सिंह पटेल, हरिओम सिंह और मूरत साकेत के खिलाफ बीएनएस की धारा 296ए, 132, 351(3), 324(4) और 3/5 के तहत अपराध दर्ज किया है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

छापेमारी टीम में ये अधिकारी-कर्मचारी थे

कार्रवाई करने वाली आबकारी टीम में सर्किल प्रभारी सुदर्शन विक्रमादित्य पांडेय के अलावा प्रधान आरक्षक शंकरदयाल प्रजापति और राजकरण त्रिपाठी भी शामिल थे।

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