सांप ने रोकी थीं सांसें, डॉक्टरों ने लौटाई जिंदगी; 12 दिन बाद केक काटकर भाई-बहन को दी विदाई

सतना जिला अस्पताल से इंसानियत और चिकित्सा सेवा की मिसाल पेश करने वाली खबर सामने आई है। जहरीले सांप के डसने के बाद जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे दो मासूम भाई-बहन को डॉक्टरों ने नया जीवन दिया। 12 दिन बाद जब दोनों स्वस्थ होकर घर लौटे तो अस्पताल में केक काटकर उनकी नई जिंदगी का जश्न मनाया गया।

जहरीले सांप के डसने से बिगड़ी थी हालत

जानकारी के अनुसार, रैगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम करसरा निवासी 12 वर्षीय चांदनी और उसका 10 वर्षीय चचेरा भाई अनुराज 12 जुलाई की सुबह घर में सो रहे थे। इसी दौरान दोनों को जहरीले सांप ने डस लिया। परिजन तत्काल दोनों को गंभीर हालत में सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय, सतना लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने तक दोनों बच्चे अचेत थे। उनकी सांसें बंद हो चुकी थीं, जबकि दिल की धड़कन चल रही थी। स्थिति बेहद गंभीर थी।

पांच दिन वेंटिलेटर पर चले इलाज

पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में मौजूद चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए इलाज शुरू किया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप द्विवेदी ने दोनों बच्चों को तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। करीब पांच दिनों तक दोनों वेंटिलेटर पर रहे और लगातार चिकित्सकीय निगरानी में उनका उपचार चलता रहा।

मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की टीम ने बचाई जान

इलाज के दौरान गांधी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने लगातार निगरानी की। 12 दिनों के इलाज के बाद दोनों बच्चों की हालत में लगातार सुधार हुआ और आखिरकार उन्हें पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डिस्चार्ज के दौरान PICU प्रभारी डॉ. संजीव प्रजापति, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने केक काटकर बच्चों की नई जिंदगी का जश्न मनाया। इस भावुक पल में परिजनों की आंखें भी नम हो गईं।

डॉक्टरों ने दी अहम सलाह, अंधविश्वास से बचें

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप द्विवेदी ने कहा कि सर्पदंश के बाद कई लोग झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में बहुमूल्य समय गंवा देते हैं, जिससे मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है। ऐसे मामलों में बिना देर किए नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए।

वहीं, शिशुरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रभात सिंह ने बताया कि सर्पदंश के बाद शुरुआती ‘गोल्डन ऑवर’ सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि इस दौरान मरीज को अस्पताल पहुंचाकर समय पर एंटी स्नेक वेनम (ASV) दिया जाए तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

सर्पदंश होने पर क्या करें?

  • मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
  • झाड़-फूंक या घरेलू उपचार पर भरोसा न करें।
  • मरीज को शांत रखें और अनावश्यक चलने-फिरने से बचाएं।
  • जितनी जल्दी संभव हो, एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध अस्पताल पहुंचें।
  • सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।

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