शबरी जलप्रपात में उफान, 40 फीट की ऊंचाई से गिर रही जलधारा

सतना। डिजिटल डेस्क

मानसून की झमाझम बारिश के बाद मध्यप्रदेश की सतना सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध शबरी जलप्रपात इन दिनों अपने रौद्र और विहंगम रूप में नजर आ रहा है। तेज बहाव के साथ चट्टानों से नीचे गिरती जलधारा, फुहारों और आसपास की हरियाली ने यहां का नजारा बदल दिया है।

चट्टानों से तेज रफ्तार में गिर रहा पानी

बारिश के बाद ऊपरी हिस्से से पानी का बहाव कई गुना बढ़ गया है। चट्टानों के बीच से निकलती जलधारा तेज रफ्तार के साथ नीचे गिर रही है, जिससे आसपास लगातार फुहारों का गुबार बन रहा है।

मटमैले पानी की तेज धार और घनी हरी वनस्पतियों के बीच सफेद फुहारों का दृश्य जलप्रपात को बेहद आकर्षक बना रहा है। मानसून के दौरान यहां पानी की मात्रा बढ़ने से जलप्रपात का स्वरूप सामान्य दिनों की तुलना में काफी बदल जाता है।

करीब 40 फीट नीचे गिरती है जलधारा

शबरी जलप्रपात को स्थानीय तौर पर शबरी झरना या तुलसी जलप्रपात भी कहा जाता है। चित्रकूट जिला प्रशासन के अनुसार यह उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के डुडैला गांव क्षेत्र में स्थित है और मझगवां से करीब 13 किलोमीटर की दूरी पर है।

उपलब्ध पर्यटन जानकारी के अनुसार जलप्रपात की जलधारा करीब 40 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरती है। तेज बारिश के दौरान अलग-अलग धाराएं अधिक पानी के कारण एक साथ मिलकर ज्यादा वेग के साथ नीचे गिरती हैं।

पयस्वनी नदी और स्थानीय जलधाराओं से बनता है झरना

शबरी जलप्रपात पयस्वनी नदी और आसपास की जलधाराओं के पानी से बनता है। चित्रकूट जिला प्रशासन के पर्यटन विवरण में बताया गया है कि पयस्वनी नदी और स्थानीय जलधाराओं के मिलने से यह जलप्रपात बनता है।

बारिश के दिनों में आसपास के जंगल और पहाड़ी क्षेत्र भी हरे हो जाते हैं। ऐसे में तेज बहाव वाली जलधारा, चट्टानें और हरियाली मिलकर इसे आकर्षक मानसूनी पर्यटन स्थल का रूप देते हैं।

भगवान राम से जुड़ी है पौराणिक मान्यता

शबरी जलप्रपात का संबंध धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। चित्रकूट जिला प्रशासन के अनुसार मान्यता है कि भगवान राम ने शबरी माता से फल ग्रहण करने के बाद इस स्थान पर स्नान किया था। इसी मान्यता के कारण जलप्रपात का नाम शबरी पड़ा।

खूबसूरती के साथ सुरक्षा भी जरूरी

मानसून में जलप्रपात का बहाव तेज होने के साथ आसपास की चट्टानें भी फिसलन भरी हो सकती हैं। ऐसे में पर्यटकों को तेज बहाव और गहरे पानी के नजदीक जाने से बचना चाहिए।

हाल के दिनों में शबरी जलप्रपात में हादसे भी सामने आए हैं। अगस्त 2026 में जैतवारा क्षेत्र के एक युवक के जलप्रपात में डूबने की घटना सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार वह सेल्फी लेते समय संतुलन बिगड़ने के बाद गहरे पानी में गिर गया था।

इसलिए मानसून में जलप्रपात का आनंद लेते समय सुरक्षित दूरी बनाए रखना और फिसलन वाली चट्टानों पर जाने से बचना बेहद जरूरी है।

मानसून में सबसे आकर्षक दिखता है शबरी जलप्रपात

चित्रकूट जिला प्रशासन के अनुसार शबरी जलप्रपात को देखने का सबसे अच्छा समय बारिश का मौसम है। जुलाई से सितंबर के बीच यहां पानी का बहाव अधिक रहता है, जिससे जलप्रपात का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर नजर आता है।

बारिश के बाद इस समय शबरी जलप्रपात की तेज गर्जना, मटमैली जलधारा, फुहारें और चारों ओर फैली हरियाली इसे एक शानदार मानसूनी दृश्य में बदल रही हैं।

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