सीएम डॉ. मोहन यादव ने देखा ड्रीम प्रोजेक्ट, 1450 गांवों तक पहुंचेगा नर्मदा का पानी
कटनी जिले की स्लीमनाबाद टनल अब लगभग तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण किया। करीब 12 किलोमीटर लंबी यह टनल नर्मदा के पानी को गुरुत्वाकर्षण के सहारे विंध्य क्षेत्र तक पहुंचाएगी, जिससे 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई मिलेगी।
सीएम ने किया स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परियोजना का निरीक्षण करते हुए इसे मध्य प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह टनल विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होगी और आने वाले वर्षों में कृषि उत्पादन के साथ क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।
1450 गांवों को मिलेगा सिंचाई का लाभ
स्लीमनाबाद टनल के जरिए बरगी परियोजना का पानी कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना सहित छह जिलों के लगभग 1450 गांवों तक पहुंचेगा। इससे करीब 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी, जबकि शुरुआती चरण में आगामी रबी सीजन के लिए लगभग 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पानी उपलब्ध कराने की तैयारी है।
इंजीनियरिंग की सबसे कठिन चुनौती
करीब 11.95 किलोमीटर लंबी इस टनल का निर्माण आसान नहीं था। निर्माण के दौरान इंजीनियरों को कठोर मार्बल और लाइमस्टोन की चट्टानों, डोलोमाइट की परतों, भूमिगत गुफाओं और अचानक धंसने वाली मिट्टी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर टनल के भीतर प्रति मिनट 25 हजार लीटर तक पानी का रिसाव हो रहा था।
अमेरिकी मशीन टूटी, जर्मन तकनीक से मिला समाधान
टनल निर्माण के दौरान इस्तेमाल की गई अमेरिकी मशीन क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद जर्मनी से अत्याधुनिक Herrenknecht मशीन मंगाई गई। विशेष ग्राउटिंग तकनीक और आधुनिक इंजीनियरिंग की मदद से परियोजना को आगे बढ़ाया गया। पूरी टनल घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के नीचे से निकाली गई, बिना किसी बड़े नुकसान के।
100 साल तक सुरक्षित रहने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि टनल का निर्माण इस तरह किया गया है कि यह 100 वर्ष तक सुरक्षित रह सकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार इसका डिजाइन भूकंप जैसी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कई हिस्सों में इसकी गहराई जमीन से लगभग 120 फीट तक है।
लागत बढ़ी, लेकिन परियोजना अंतिम चरण में
स्लीमनाबाद टनल का अनुबंध वर्ष 2008 में हुआ था। शुरुआती लागत 799 करोड़ रुपये थी, लेकिन कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के कारण लागत बढ़कर करीब ₹1,610 करोड़ हो गई। फिलहाल परियोजना का 96.66 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
किसानों और क्षेत्र की बदलेगी तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। इससे पेयजल उपलब्धता, कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने किसानों से अपनी जमीन नहीं बेचने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले समय में यह क्षेत्र कृषि विकास के मामले में नई पहचान बनाएगा।
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