सतना। जसो थाना क्षेत्र के अमकुई गांव में हुए चर्चित कियोस्क संचालक हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि 21 वर्षीय अतुल पुत्र रामकेश कुशवाहा की हत्या उसके करीबी दोस्त सुधीर उर्फ श्यामू नामदेव (19) ने पुरानी रंजिश के चलते की थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
जुलाई के विवाद ने ली दोस्ती की जान
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि जुलाई महीने में दोनों दोस्तों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद वह अंदर ही अंदर अतुल से बदला लेने की योजना बनाने लगा।
हालांकि आर्थिक रूप से संपन्न अतुल से दूरी बनाना उसे नुकसान का सौदा लग रहा था। इसलिए उसने दोस्ती बनाए रखी और सामान्य व्यवहार करता रहा, ताकि किसी को उस पर शक न हो।
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बहाने से ले गया और कर दी हत्या
पुलिस के अनुसार, 1 अगस्त की रात अतुल अपनी कियोस्क दुकान बंद कर घर लौट रहा था। इसी दौरान आरोपी उसे फुल्की खिलाने के बहाने भठिया की ओर सुनसान इलाके में ले गया।
वहां पहले तार से उसका गला घोंटा और फिर सिर पर पत्थर पटककर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने मृतक की जेब से मोबाइल और नकदी निकाल ली तथा शव को घसीटकर झाड़ियों में छिपा दिया।
आरोपी की निशानदेही पर मिला मोबाइल और नकदी
हत्या के बाद आरोपी सामान्य दिनचर्या की तरह घर लौट गया। पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर उसे हिरासत में लिया तो उसने जुर्म कबूल कर लिया।
उसकी निशानदेही पर मृतक का मोबाइल फोन और हजारों रुपये की नकदी बरामद की गई। गुरुवार को आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
गुमशुदगी से शुरू हुई थी पूरी कहानी
अतुल कुशवाहा मोबाइल, फोटोकॉपी और ऑनलाइन कियोस्क सेंटर का संचालन करता था। वह 1 अगस्त की रात अचानक लापता हो गया था।
परिजनों ने उसी रात थाने पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अगले दिन गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर सुधीर उर्फ श्यामू से पूछताछ भी की, लेकिन उसे छोड़ दिया गया।
4 अगस्त को मिला था रक्तरंजित शव
लगातार तलाश के बीच 4 अगस्त को अमकुई गांव के स्कूल के पीछे अतुल का रक्तरंजित शव मिला। शव मिलने की खबर फैलते ही गांव में भारी आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
पुलिस पर फूटा था ग्रामीणों का गुस्सा
हत्या के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लापरवाही का आरोप लगाया। शव उठाने पहुंची पुलिस टीम पर पथराव किया गया, वाहनों में तोड़फोड़ हुई और करीब पांच घंटे तक शव नहीं उठाने दिया गया।
इसके बाद नागौद एसडीओपी कार्यालय का दो दिन तक घेराव किया गया। परिजनों का आरोप था कि हत्या में एक से अधिक लोग शामिल हैं और पुलिस सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ और 5 अगस्त को परिजन पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर प्रयागराज रवाना हो गए।
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