बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पहली बार रेस्क्यू के बाद रेडियो कॉलर से निगरानी में रखी गई बाघिन अब पूरी तरह आजाद हो गई है। करीब 11 महीने तक उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद वन विभाग ने खराब हो चुके रेडियो कॉलर को हटाकर उसे प्राकृतिक आवास में मुक्त कर दिया।
रेडियो कॉलर ने दिया जवाब, फिर लिया गया बड़ा फैसला
उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर क्षेत्र में छोड़ी गई बाघिन जुलाई की शुरुआत में करीब 10 दिनों तक ट्रैक नहीं हो सकी। जांच में पता चला कि उसके रेडियो कॉलर से सैटेलाइट और रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल मिलना बंद हो गया था।
वन विभाग की टीम ने दोबारा सर्च ऑपरेशन चलाकर बाघिन को खोज निकाला। इसके बाद खराब रेडियो कॉलर की जानकारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) कार्यालय, भोपाल को भेजी गई। अनुमति मिलने के बाद बाघिन को बेहोश कर कॉलर हटाया गया।
स्वस्थ मिली बाघिन, फिर प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया
वन्यजीव चिकित्सकों की मौजूदगी में बाघिन का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिसमें वह पूरी तरह स्वस्थ पाई गई। इसके बाद उसे होश में लाकर धमोखर के प्राकृतिक जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
वन अधिकारियों के अनुसार, बाघिन सामान्य रूप से जंगल की ओर चली गई और अब बिना किसी कृत्रिम निगरानी उपकरण के प्राकृतिक जीवन जी सकेगी।
11 महीने तक लगातार रखी गई थी निगरानी
क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि अगस्त 2025 में रेस्क्यू के बाद बाघिन को धमोखर क्षेत्र में छोड़ा गया था। राहत की बात यह रही कि उसने दोबारा मानव बस्तियों का रुख नहीं किया और पूरे समय जंगल के भीतर ही सक्रिय रही। बाघिन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए धमोखर रेंज की एक विशेष मॉनिटरिंग टीम लगातार तैनात थी।
नर बाघ के साथ भी देखी गई, कुनबा बढ़ने की उम्मीद
वन विभाग की मॉनिटरिंग टीम के अनुसार, हाल के दिनों में बाघिन को धमोखर के जंगलों में एक नर बाघ के साथ भी देखा गया है। ऐसे में अधिकारियों को उम्मीद है कि प्राकृतिक रूप से उसका प्रजनन होगा और आने वाले समय में बांधवगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ाने में यह बाघिन अहम भूमिका निभा सकती है।
63 अधिकारियों और चार हाथियों ने निभाई अहम भूमिका
रेडियो कॉलर हटाने का पूरा अभियान पीएफ-126 (बरबसपुर बीट, झांझर, धमोखर बफर) में संचालित किया गया। अभियान में उप संचालक, सहायक संचालक, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित 63 अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान लक्ष्मण, सूर्या, रामा और श्याम नामक प्रशिक्षित हाथियों और उनके महावतों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।