बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर (PK) की पहचान चुनावी रणनीतिकार से आगे बढ़कर अब एक सफल नेता की बन चुकी है। लेकिन इस पूरे सफर में एक ऐसा नाम भी है, जो हमेशा सुर्खियों से दूर रहा, फिर भी हर कठिन दौर में PK के साथ खड़ा रहा—उनकी पत्नी डॉ. जान्हवी दास। डॉ. जान्हवी दास पेशे से चिकित्सक (Physician) हैं और मूल रूप से गुवाहाटी (असम) की रहने वाली हैं। राजनीति से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा। वे लंबे समय तक चिकित्सा सेवा से जुड़ी रहीं और सार्वजनिक जीवन से दूर रहीं। प्रशांत किशोर और जान्हवी दास का एक बेटा भी है।
अफ्रीका में हुई थी पहली मुलाकात
प्रशांत किशोर संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में अफ्रीकी देश चाड (Chad) में कार्यरत थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात डॉ. जान्हवी दास से हुई। दोनों स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे थे। धीरे-धीरे यह परिचय दोस्ती और फिर विवाह में बदल गया।
राजनीति से दूर रहीं, लेकिन हमेशा बनीं सबसे बड़ी ताकत
प्रशांत किशोर जब चुनावी रणनीतिकार के रूप में देशभर में व्यस्त रहे, तब परिवार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से डॉ. जान्हवी दास ने संभाली। बाद में जब PK ने बिहार में जन सुराज पदयात्रा शुरू की और हजारों किलोमीटर पैदल चलकर लोगों से संवाद किया, तब भी उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्हें पूरा सहयोग दिया। PK स्वयं कई मंचों से कह चुके हैं कि उनकी पत्नी के सहयोग के बिना यह यात्रा संभव नहीं थी।
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पहली बार सार्वजनिक मंच पर कराया परिचय
अगस्त 2024 में जन सुराज के महिला सम्मेलन के दौरान प्रशांत किशोर ने पहली बार सार्वजनिक मंच से अपनी पत्नी का परिचय कराया। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता के पीछे डॉ. जाह्नवी दास का बहुत बड़ा योगदान है और वर्षों तक उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां संभालकर उन्हें बिहार के लिए काम करने का अवसर दिया।
जन सुराज पार्टी में क्या रही भूमिका
जाह्नवी दास पार्टी की औपचारिक पदाधिकारी नहीं हैं, लेकिन जन सुराज अभियान और पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी लगातार बढ़ी है। महिला कार्यशालाओं, सामाजिक संवाद कार्यक्रमों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात में उन्होंने भाग लिया। हालांकि, पार्टी की ओर से उन्हें किसी संगठनात्मक पद पर नियुक्त नहीं किया गया है।
बांकीपुर उपचुनाव में निभाई अहम भूमिका
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में डॉ. जान्हवी दास लगातार प्रशांत किशोर के साथ नजर आईं। नामांकन के दौरान भी वे मौजूद रहीं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं से संवाद किया और जन सुराज के पक्ष में समर्थन जुटाने में सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी सादगी और सहज व्यवहार की भी काफी चर्चा हुई।
पर्दे के पीछे की सबसे बड़ी सहयोगी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां प्रशांत किशोर रणनीति और जनसंपर्क पर ध्यान केंद्रित करते रहे, वहीं डॉ. जान्हवी दास ने परिवार और निजी जीवन की जिम्मेदारियां संभालकर उन्हें पूरा समय राजनीति को देने में मदद की। यही वजह है कि PK कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से अपनी पत्नी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बता चुके हैं।