सतना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शुरू हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को देशभर में जनभागीदारी का उत्सव बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सतना और मैहर जिले के सरकारी स्कूल इसमें अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। लगातार निर्देश, समीक्षा बैठकें और मॉनिटरिंग के बावजूद अंतिम समय तक दोनों जिले प्रदेश की रैंकिंग में पिछड़े रहे। हालात ऐसे बने कि जिला शिक्षा अधिकारियों को फिर से सभी अधिकारियों और स्कूल प्रमुखों को सख्त निर्देश जारी करने पड़े।
सतना और मैहर की रैंकिंग ने बढ़ाई चिंता
शिक्षा विभाग की 30 जुलाई दोपहर 1 बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार, सतना जिले के केवल 229 विद्यालयों ने ही ईको क्लब फॉर मिशन लाइफ पोर्टल पर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इसके साथ जिला प्रदेश में 41वें स्थान पर रहा।
वहीं मैहर जिले के सिर्फ 205 विद्यालयों ने पोर्टल पर जानकारी अपलोड की, जिसके चलते जिला 43वें स्थान पर पहुंच गया। प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में दोनों का प्रदर्शन बेहद कमजोर माना गया।
डीईओ को फिर जारी करने पड़े सख्त निर्देश
धीमी प्रगति की रिपोर्ट मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारियों ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO), संकुल प्राचार्यों, हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों को तत्काल निर्देश जारी किए।
निर्देश में कहा गया कि सभी विद्यालयों से समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक पौधारोपण कराया जाए और उसकी पूरी जानकारी 31 जुलाई तक ईको क्लब फॉर मिशन लाइफ पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड की जाए।
फोटो अपलोड को लेकर भी दिए गए निर्देश
शिक्षा विभाग ने केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि उसकी डिजिटल रिपोर्टिंग पर भी जोर दिया है। अधिकारियों से कहा गया कि पोर्टल पर अपलोड होने वाली तस्वीरों में अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की भागीदारी दिखाई दे, ताकि अभियान की वास्तविक सहभागिता परिलक्षित हो सके।
बड़ा सवाल: पौधे नहीं लगे या रिपोर्ट नहीं हुई
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अभियान को लेकर पहले से लगातार निर्देश जारी किए जा रहे थे, तो दोनों जिले अंतिम समय तक पिछड़े क्यों रहे?
क्या स्कूलों में वास्तव में पौधारोपण नहीं हुआ, या फिर पौधे लगाने के बावजूद समय पर पोर्टल पर जानकारी अपलोड नहीं की गई? दोनों ही स्थितियां शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
सरकार की प्राथमिकता वाला अभियान
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में शामिल है। इसका उद्देश्य केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण और मां के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना भी है।
ऐसे में सतना और मैहर जैसे जिलों का प्रदेश की रैंकिंग में निचले पायदान पर रहना स्थानीय शिक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
अब निगाहें अंतिम रिपोर्ट पर
अभियान की समय-सीमा पूरी होने से पहले विभाग ने रिपोर्टिंग बढ़ाने की कोशिश तेज कर दी थी। अब यह देखना होगा कि अंतिम आंकड़ों में दोनों जिलों की रैंकिंग में कितना सुधार हुआ या फिर अभियान में कमजोर प्रदर्शन का ठप्पा बरकरार रहा।