डिनर का दबाव, अश्लील मैसेज के आरोप; सागर यूनिवर्सिटी के HOD हटाए गए

मध्य प्रदेश के सागर स्थित डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में महिला शोधार्थियों द्वारा भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। जांच पूरी होने तक प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को विभागाध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है।

शोधार्थियों ने लगाए गंभीर आरोप

विश्वविद्यालय के सामान्य एवं व्यावहारिक भूगोल विभाग की एक दर्जन से अधिक महिला शोधार्थियों ने विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज पर मानसिक उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं।

शिकायत में कहा गया है कि विभागाध्यक्ष कथित रूप से व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर शोधार्थियों को डिनर के लिए बुलाने का दबाव बनाते थे और अनुचित बातचीत करते थे। इसके अलावा अकादमिक माहौल प्रभावित करने और शोधार्थियों पर मानसिक दबाव बनाने के भी आरोप लगाए गए हैं।

जुलाई में शुरू हुआ पूरा विवाद

मामले की शुरुआत जुलाई 2026 में हुई, जब एक महिला शोधार्थी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित शिकायत देकर मानसिक उत्पीड़न, अमर्यादित व्यवहार, गैर-अकादमिक चाय-नाश्ते के निमंत्रण और विभाग में बुनियादी सुविधाओं के अभाव की शिकायत की।

इसके बाद 20 जुलाई को विभागाध्यक्ष की ओर से भी कुछ शोधार्थियों के खिलाफ अनुशासनहीनता, अनुपस्थिति और फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई।

जांच के बीच HOD पद से हटाए गए

मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने जांच शुरू की। डीन की अनुशंसा के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 29 जुलाई को आदेश जारी कर प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को जांच पूरी होने तक विभागाध्यक्ष के प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त कर दिया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी दबाव के जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। जांच पूरी होने तक विभागाध्यक्ष का प्रभार व्यावहारिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता को सौंपा गया है।

शिकायत वापस लेने के आरोपों ने बढ़ाया विवाद

मामले में नया मोड़ तब आया, जब 23 और 24 जुलाई को शिकायत वापस लेने का एक पत्र विश्वविद्यालय में प्रस्तुत किया गया। हालांकि, छह शोधार्थियों ने बाद में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि उनसे बंद कमरे में सादे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए गए। उनका कहना है कि उन्हें पुलिस कार्रवाई, मानहानि के मुकदमे और करियर खराब होने की धमकी देकर शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर किया गया।

शोधार्थियों ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में विभाग के दो सहायक प्राध्यापकों की भी भूमिका रही। इन आरोपों की जांच भी विश्वविद्यालय स्तर पर की जा रही है।

ABVP ने भी खोला मोर्चा

मामले के सामने आने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की विश्वविद्यालय इकाई ने विरोध प्रदर्शन किया और कुलपति को ज्ञापन सौंपकर प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को विभागाध्यक्ष पद से हटाने तथा निष्पक्ष जांच की मांग की।

विश्वविद्यालय प्रशासन का क्या कहना है

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच आंतरिक शिकायत समिति (ICC) कर रही है। जांच पूरी होने तक प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है ताकि किसी भी पक्ष पर दबाव न पड़े और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

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