फ्री-फायर गेम में दोस्ती, नाबालिग को गुजरात से रीवा लाया; अमरपाटन से आरोपी गिरफ्तार

सतना। ऑनलाइन गेम फ्री-फायर के जरिए हुई दोस्ती के बाद गुजरात की 15 वर्षीय नाबालिग को रीवा लाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 वर्षीय युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले आया और यहां किराए के कमरे में रखा। मामले में फरार चल रहे आरोपी को गुजरात पुलिस ने अमरपाटन से गिरफ्तार कर लिया।

फ्री-फायर गेम के जरिए हुई थी नाबालिग से दोस्ती

पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान 20 वर्षीय शिवाकांत के रूप में हुई है। वह मोबाइल पर फ्री-फायर गेम खेलने का शौकीन था। इसी दौरान उसकी ऑनलाइन दोस्ती अहमदाबाद में रहने वाली 15 वर्षीय नाबालिग से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लगी। पुलिस के अनुसार, इसके बाद आरोपी नाबालिग से मिलने गुजरात पहुंचा। आरोप है कि दिसंबर 2025 में वह नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ रीवा ले आया। यहां उसने उसे किराए के कमरे में रखा।

परिजन की शिकायत पर गुजरात में दर्ज हुआ था केस

नाबालिग के लापता होने के बाद उसके परिजनों ने गुजरात पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया और उसकी तलाश शुरू की। पुलिस ने जांच के दौरान नाबालिग को कुछ ही दिन बाद रीवा से बरामद कर लिया। हालांकि, उस समय आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सका। इसके बाद नाबालिग के बयान के आधार पर मामले में दुष्कर्म और POCSO Act की धाराएं भी जोड़ी गईं।

साइबर सेल की मदद से आरोपी तक पहुंची पुलिस

आरोपी की तलाश के लिए गुजरात पुलिस ने तकनीकी जांच का सहारा लिया। साइबर सेल की मदद से उसकी गतिविधियों और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई गई। जांच के दौरान पुलिस को हाल ही में आरोपी के अमरपाटन में होने की पुख्ता जानकारी मिली।

इसके बाद गुजरात पुलिस की टीम शनिवार को अमरपाटन पहुंची। स्थानीय पुलिस की मदद से टीम ने दबिश देकर आरोपी शिवाकांत को पकड़ लिया।

गुजरात पुलिस अपने साथ अहमदाबाद ले गई

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद गुजरात पुलिस आरोपी को अपने साथ अहमदाबाद ले गई।

अब गुजरात पुलिस मामले में आगे की जांच करेगी। आरोपी और पीड़िता के बीच ऑनलाइन संपर्क कैसे शुरू हुआ, नाबालिग को रीवा कैसे लाया गया और इस दौरान किन परिस्थितियों में वह यहां रही, इन बिंदुओं की भी जांच की जा सकती है। मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई के बाद घटनाक्रम की और जानकारी सामने आएगी।

ऑनलाइन गेमिंग में बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल

यह मामला ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए नाबालिगों से होने वाली दोस्ती और उसके बाद पैदा होने वाले जोखिमों को भी सामने लाता है। बच्चे गेम खेलते समय अनजान लोगों के संपर्क में आ सकते हैं। बातचीत आगे बढ़ने पर निजी जानकारी साझा करने का खतरा भी रहता है।

ऐसे में अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। खासकर किसी अनजान व्यक्ति से लगातार बातचीत या मिलने की योजना जैसी स्थिति सामने आए तो तुरंत सतर्क होना चाहिए।

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