सतना! स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। संयुक्त टीम ने 26 स्कूल बसों की जांच की। इस दौरान एक बस में इमरजेंसी गेट के सामने सीट लगी मिली। बस का फिटनेस निरस्त कर दिया गया। आठ वाहनों पर कुल 30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।
26 स्कूल बसों की जांच
स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर मिल रही शिकायतों के बीच शनिवार को परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। टीम ने शहर में संचालित 26 स्कूल बसों की जांच की। इस दौरान एक बस में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई। बस के इमरजेंसी गेट के सामने ही सीट लगा दी गई थी। इसके अलावा बस में अग्निशमन यंत्र की एक्सपायरी डेट भी निकल चुकी थी। बस में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं मिला। सीट कवर भी फटे हुए थे। इन कमियों को देखते हुए आरटीओ रवि बरेलिया ने बस का फिटनेस निरस्त कर दिया।
एक बस पर 15 हजार, सात अन्य वाहनों पर भी कार्रवाई
जांच के दौरान एक अन्य स्कूल बस में परमिट और फिटनेस से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले। इस बस पर 15 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। वहीं पांच अन्य स्कूल बसों में भी सुरक्षा उपकरणों से जुड़ी कमियां मिलीं। इनमें अग्निशमन यंत्र और फर्स्ट एड बॉक्स सहित अन्य खामियां शामिल थीं। कार्रवाई के दौरान कुल 8 वाहनों पर 30 हजार रुपए की पेनाल्टी लगाई गई। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने बस संचालकों को साफ निर्देश दिए हैं कि बच्चों के परिवहन में सुरक्षा नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश
आरटीओ रवि बरेलिया और यातायात थाना प्रभारी पूनम रावत ने स्कूल बस संचालकों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने कहा कि स्कूल बसों का संचालन सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। बसों में इमरजेंसी गेट, अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स और अन्य जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं दुरुस्त रखना अनिवार्य है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि जांच के दौरान दोबारा नियमों की अनदेखी मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच में सामने आईं सुरक्षा संबंधी कमियां
शनिवार की कार्रवाई का उद्देश्य स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना था। इमरजेंसी गेट के सामने सीट लगाए जाने का मामला विशेष रूप से गंभीर माना गया। आपात स्थिति में यही गेट बच्चों को बस से बाहर निकालने का वैकल्पिक रास्ता होता है। ऐसे में उसके सामने सीट या अन्य अवरोध होना बच्चों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसी वजह से संबंधित बस का फिटनेस निरस्त किया गया। वहीं अन्य वाहनों में मिली कमियों पर जुर्माना लगाया गया।
अब आगे भी जारी रह सकती है जांच
स्कूल बसों में नियमों की अनदेखी को लेकर शिकायतें मिलने के बाद हुई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के लिए बस संचालकों पर भरोसा करते हैं। ऐसे में बसों की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा उपकरणों का दुरुस्त होना बेहद जरूरी है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की इस कार्रवाई से साफ है कि स्कूल बसों की जांच आगे भी जारी रह सकती है। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों में छोटी सी लापरवाही भी बड़े खतरे में बदल सकती है। इसलिए बस संचालकों को कार्रवाई से पहले ही सभी सुरक्षा मानकों की जांच कर उन्हें दुरुस्त रखना होगा।