56 साल बाद गुरु पूर्णिमा पर दुर्लभ संयोग, बुधादित्य और शश राजयोग का मिलेगा शुभ प्रभाव

इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व कई मायनों में खास रहने वाला है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार करीब 56 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब गुरु पूर्णिमा पर बुधादित्य राजयोग और शश राजयोग का प्रभाव एक साथ रहेगा। मान्यता है कि इस शुभ योग में गुरु पूजा, मंत्र जाप, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।

50 वर्ष से ज्‍यादा साल बाद बन रहा ऐसा संयोग

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर ग्रहों की स्थिति अत्यंत शुभ रहेगी। सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग बनेगा, वहीं शनि की विशेष स्थिति के कारण शश राजयोग का भी प्रभाव रहेगा। बताया जा रहा है कि करीब 56 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे गुरु पूजन, मंत्र जाप, ध्यान, ज्ञानार्जन और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व और बढ़ जाएगा।

पूर्ण बल में रहेंगे चंद्रमा

ज्योतिषाचार्य पं. शरद द्विवेदी के अनुसार गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रमा मकर राशि में पूर्ण बल के साथ विराजमान रहेंगे। पूर्णिमा तिथि होने के कारण चंद्रमा का प्रभाव अधिक रहेगा। ऐसे में मानसिक शांति, आध्यात्मिक साधना और गुरु कृपा प्राप्त करने के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है।

उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने अभी तक गुरु दीक्षा नहीं ली है, उनके लिए यह दिन शुभ रहेगा। वहीं जिनके गुरु हैं, उन्हें गुरु के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए और जीवन में मिले ज्ञान एवं मार्गदर्शन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए।

बुधादित्य और शश राजयोग का क्या होगा प्रभाव

सूर्य और बुध के एक ही राशि में होने से बुधादित्य राजयोग बन रहा है। यह योग 28 जुलाई से प्रभावी हो जाएगा और 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर इसका विशेष प्रभाव रहेगा।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस योग में किए गए—

  • गुरु पूजन
  • मंत्र जाप
  • दान-पुण्य
  • धार्मिक अनुष्ठान
  • अध्ययन एवं ज्ञानार्जन
  • नई आध्यात्मिक शुरुआत

का विशेष शुभ फल प्राप्त होता है।

कब से कब तक रहेगी पूर्णिमा तिथि

पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई शाम 6:18 बजे से प्रारंभ होगी और 29 जुलाई रात 8:05 बजे तक रहेगी।

उदयातिथि के आधार पर 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से गुरु का सम्मान करने, सेवा करने और ज्ञान प्राप्ति का संकल्प लेने से जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस अवसर पर शिष्य अपने गुरु का सम्मान करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। देशभर के मंदिरों, आश्रमों और आध्यात्मिक संस्थानों में गुरु पूजन, सत्संग, यज्ञ और भंडारे जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

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