मैहर की अपर सत्र अदालत ने दिव्यांग महिला से सामूहिक दुष्कर्म के चर्चित मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 6-6 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया
मैहर की अपर सत्र अदालत ने बदेरा थाना क्षेत्र में दर्ज सामूहिक दुष्कर्म के मामले में श्रीराम कोल, सूरज कोल और लेद्दू कोल को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने तीनों दोषियों पर 6-6 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पहले जिला अभियोजन अधिकारी गणेश पांडेय और बाद में अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी नरेन्द्र कुमार उपाध्याय ने पैरवी की।
मदद करने के बजाय किया दुष्कर्म
अभियोजन के अनुसार, 1 जनवरी 2025 की शाम दिव्यांग पीड़िता पड़ोस में आयोजित जन्मदिन की पार्टी में गई थी। काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
पीड़िता की मां को वह एक निर्माणाधीन मकान में बेहोशी की हालत में मिली। होश आने पर पीड़िता ने इशारों से पूरी घटना बताई और तीन आरोपियों की ओर संकेत कर उनकी पहचान की। पीड़िता ने बताया कि दो लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और बाहर आने पर तीसरे व्यक्ति ने मदद करने के बजाय उसके साथ भी दुष्कर्म किया। अगले दिन पीड़िता की मां ने थाने में शिकायत दर्ज कराई।
विशेषज्ञ की मदद से दर्ज हुए बयान
मामले में पीड़िता के बयान विशेषज्ञ के.के. शर्मा की सहायता से मजिस्ट्रेट न्यायालय में दर्ज कराए गए। बाद में सत्र न्यायालय में भी विशेषज्ञ की मदद से ही पीड़िता के बयान रिकॉर्ड किए गए।
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत में तीनों आरोपियों की पहचान की। उसने एक आरोपी की पहचान उसके बाहर निकले दांत के आधार पर भी की। इसके अलावा डीएनए जांच रिपोर्ट भी अभियोजन के पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुई।
67 दस्तावेज और 20 गवाह बने अहम साक्ष्य
अभियोजन ने अदालत के समक्ष 67 दस्तावेज, 13 भौतिक साक्ष्य (आर्टिकल) और 20 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों का सूक्ष्म परीक्षण करने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी माना।
मैहर जिले में पहली बार दिव्यांगजन अधिनियम के तहत सजा
नवनिर्मित मैहर जिले में यह पहला मामला है, जिसमें अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी दोषियों को सजा सुनाई है। इसे जिले के महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों में माना जा रहा है।