मैहर के विश्व प्रसिद्ध मां शारदा मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा बाढ़ का वीडियो पूरी तरह फर्जी निकला है। मैहर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया है और मंदिर परिसर में ऐसी कोई घटना नहीं हुई।
AI वीडियो से फैलाई गई बाढ़ की अफवाह
सोशल मीडिया पर इन दिनों मां शारदा मंदिर, मैहर में भीषण बाढ़ का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मंदिर की सीढ़ियों पर तेज जलप्रवाह, अफरा-तफरी का माहौल और लोगों को जान बचाने के लिए संघर्ष करते हुए दिखाया गया है। दावा किया गया कि मंदिर परिसर में अचानक आई बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है।
यह वीडियो ‘सनातन अध्यात्म’ नामक एक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया, जिसे तीन लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। वीडियो के वायरल होने के बाद कई लोगों में भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा हो गई।
पुलिस ने जांच के बाद बताया- वीडियो पूरी तरह फर्जी
वीडियो के वायरल होने के बाद मामला मैहर पुलिस के संज्ञान में पहुंचा। मैहर के सीएसपी महेंद्र सिंह चौहान ने प्रारंभिक जांच के बाद स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि मां शारदा मंदिर में बाढ़ आने की खबर पूरी तरह गलत और भ्रामक है। मंदिर परिसर में सामान्य स्थिति बनी हुई है और देशभर से आने वाले श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर रहे हैं। सीएसपी ने बताया कि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो किसने बनाया, किस प्लेटफॉर्म से प्रसारित किया गया और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।
लोगों से अफवाह न फैलाने की अपील
मैहर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या संदेश को बिना सत्यापन सोशल मीडिया पर साझा न करें। यदि कोई संदिग्ध या भ्रामक सामग्री दिखाई दे तो उसकी सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस थाने या संबंधित अधिकारियों को दें।
पुलिस का कहना है कि फर्जी सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि अफवाह फैलाकर धार्मिक भावनाओं और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके।
पहले भी फैल चुकी हैं फर्जी अफवाहें
यह पहला मौका नहीं है जब मां शारदा मंदिर को लेकर भ्रामक दावे किए गए हों। इससे पहले भी सोशल मीडिया पर मंदिर में आग लगने और बम ब्लास्ट जैसी फर्जी खबरें वायरल हुई थीं, जो जांच में पूरी तरह निराधार साबित हुई थीं। ऐसे मामलों ने एक बार फिर AI तकनीक के दुरुपयोग और सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज के खतरे को सामने ला दिया है।