भोपाल। डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश में धार्मिक आस्था वाले 19 शहरों, कस्बों और ग्राम पंचायत क्षेत्रों में शराब की बिक्री पर रोक लागू है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 अगस्त 2026 को नशामुक्ति अभियान के कार्यक्रम में एक बार फिर इन 19 धार्मिक क्षेत्रों में शराबबंदी लागू होने का जिक्र किया। यह कोई नया फैसला नहीं है, बल्कि जनवरी 2025 में लिए गए निर्णय का दोहराव है।
कब लिया गया था शराबबंदी का फैसला
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 24 जनवरी 2025 को महेश्वर में हुई विशेष बैठक में 19 धार्मिक क्षेत्रों में शराब की दुकानें बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उस समय इसे नशामुक्ति की दिशा में पहला बड़ा कदम बताया था।
सरकार का फैसला नई आबकारी नीति के साथ 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हुआ। इसके तहत संबंधित नगरीय सीमाओं और चिन्हित ग्राम पंचायत क्षेत्रों में शराब की दुकानें और बार बंद किए गए।
अगस्त 2026 में फिर क्यों चर्चा में आया मामला
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2 अगस्त 2026 को भोपाल में नशामुक्त युवा अभियान से जुड़े कार्यक्रम में कहा कि राज्य सरकार ने 19 धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू की है और इन क्षेत्रों से शराब की दुकानें हटा दी गई हैं। उनका बयान नशे के खिलाफ राज्य सरकार की मौजूदा मुहिम के संदर्भ में था।
यानी अगस्त 2026 में 19 नए शहरों में शराबबंदी लागू नहीं की गई, बल्कि पहले से लागू व्यवस्था को मुख्यमंत्री ने फिर रेखांकित किया।
कौन-कौन से 19 धार्मिक क्षेत्र शामिल हैं
शराबबंदी की सूची में 13 नगरीय क्षेत्र और 6 ग्राम पंचायत क्षेत्र शामिल हैं। इसमें नगरीय क्षेत्रों में उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मंडलेश्वर, ओरछा, मैहर, चित्रकूट, दतिया, पन्ना, मंडला, मुलताई, मंदसौर, अमरकंटक और ग्राम पंचायत क्षेत्रों में सलकनपुर, कुंडलपुर, बांदकपुर, . बरमान कलां, बरमान खुर्द एवं लिंगा शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में धार्मिक महत्व के अलग-अलग केंद्र हैं। उज्जैन में महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग, मैहर में मां शारदा और चित्रकूट में धार्मिक एवं रामायण से जुड़ी मान्यताएं प्रमुख हैं। मध्य प्रदेश के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग की सूची में भी ओंकारेश्वर, मंडला, पन्ना, दतिया, चित्रकूट, मैहर, सलकनपुर और अमरकंटक जैसे क्षेत्रों को पवित्र/अधिसूचित क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
पन्ना और मैहर के लिए क्या मायने रखता है
विंध्य के लिहाज से यह फैसला खास महत्व रखता है। पन्ना और मैहर दोनों 19 क्षेत्रों की सूची में शामिल हैं। इसके अलावा चित्रकूट भी इसी व्यवस्था के दायरे में आता है।
इसका मतलब है कि इन निर्धारित प्रशासनिक सीमाओं के भीतर शराब की दुकानें और बार संचालित नहीं किए जाने हैं। हालांकि यह समझना जरूरी है कि शराबबंदी का वास्तविक दायरा संबंधित नगरीय निकाय या ग्राम पंचायत की निर्धारित सीमा से जुड़ा है।
कितनी शराब दुकानें बंद हुई थीं
फैसले के समय सामने आई जानकारी के मुताबिक इन 19 क्षेत्रों में 47 कंपोजिट शराब दुकानें बंद की जानी थीं। इससे राज्य सरकार को आबकारी राजस्व में करीब 450 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान भी सामने आया था।
सरकार ने इस फैसले को केवल राजस्व के नजरिए से नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और नशामुक्ति अभियान से जोड़कर पेश किया था।
नर्मदा किनारे पहले से अलग नियम
मध्य प्रदेश सरकार ने 2025 में यह भी कहा था कि नर्मदा नदी के दोनों ओर 5 किलोमीटर के दायरे में शराबबंदी की मौजूदा नीति जारी रहेगी। यह 19 धार्मिक क्षेत्रों वाले फैसले से अलग व्यवस्था है।