NEET-UG 2026 समेत हालिया परीक्षा विवादों के बाद केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल माफिया पर शिकंजा कसने के लिए कानून को और सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा है। Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 के जरिए सजा, जुर्माना और जांच से लेकर ट्रायल तक के प्रावधानों को और कठोर बनाने की तैयारी है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसका मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाना, पेपर लीक माफिया पर सख्त कार्रवाई करना और मामलों में जल्द न्याय सुनिश्चित करना है।
क्या है Public Examinations Act
यह कानून UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड (RRBs), IBPS, NTA और केंद्र सरकार की अधिसूचित भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों को रोकने के लिए बनाया गया था। अब सरकार ने इसमें संशोधन कर इसे और सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा है।
विधेयक में क्या-क्या प्रस्ताव है
1. आम आरोपियों के लिए सजा बढ़ाने का प्रस्ताव
वर्तमान कानून में दोषी पाए जाने पर 3 से 5 वर्ष तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
संशोधन विधेयक में प्रस्ताव है कि सजा बढ़ाकर 5 से 10 वर्ष की जाए और जुर्माना 50 लाख रुपये तक किया जाए।
2. सर्विस प्रोवाइडर पर कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव
मौजूदा कानून में परीक्षा संचालन से जुड़ी संस्था या सर्विस प्रोवाइडर पर अधिकतम 1 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि यह जुर्माना बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किया जाए।
इसके अलावा, परीक्षा संचालन से प्रतिबंधित करने की अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष करने का भी प्रस्ताव है।
3. संगठित पेपर लीक माफिया पर और सख्ती
मौजूदा कानून में संगठित अपराध के मामलों में 5 से 10 वर्ष की सजा और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
संशोधन विधेयक में प्रस्ताव है कि सजा बढ़ाकर 7 से 10 वर्ष की जाए और जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक किया जाए।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट का भी प्रस्ताव
यदि विधेयक पारित होता है, तो परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट नामित किए जाएंगे। राज्यों को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।
जांच और ट्रायल के लिए समय सीमा
सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि परीक्षा धांधली के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी की जाए।
इसके अलावा, चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हाईकोर्ट में अपीलों के शीघ्र निस्तारण की भी व्यवस्था प्रस्तावित है।
स्पेशल टास्क फोर्स का प्रस्ताव
यदि विधेयक पारित होता है, तो केंद्र सरकार आवश्यकता पड़ने पर Special Task Force (STF) गठित कर सकेगी, जो पेपर लीक और परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों की जांच में समन्वय करेगी।
सरकार संशोधन क्यों ला रही है
सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। ऐसे मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाने और परीक्षा प्रणाली में भरोसा मजबूत करने के उद्देश्य से यह संशोधन विधेयक लाया गया है।