रीवा में प्रश्नपत्र वायरल मामले में बड़ी कार्रवाई, डॉ. प्रभाकर दोषी करार

रीवा संभाग में प्रश्नपत्र वायरल मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। जांच समिति ने मऊगंज कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर सिंह को अंग्रेजी विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले वायरल करने का दोषी पाया है। इसके बाद उन्हें प्रश्नपत्र निर्माण और उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन के कार्य से हटा दिया गया है।

जांच समिति की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई

अतिरिक्त संचालक (उच्च शिक्षा) रीवा संभाग द्वारा गठित जांच समिति ने शहीद केदारनाथ कॉलेज, मऊगंज के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर सिंह को आधार पाठ्यक्रम अंग्रेजी विषय का प्रश्नपत्र वायरल करने का दोषी ठहराया है।

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा रीवा संभाग डॉ. महेन्द्रमणि द्विवेदी ने डॉ. प्रभाकर सिंह को भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने और उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दायित्व से अलग कर दिया है। इस संबंध में जांच प्रतिवेदन आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग भोपाल को भी भेज दिया गया है।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार 3 जून 2026 को शासकीय संजय गांधी स्मृति स्वशासी कॉलेज, सीधी में स्नातक तृतीय वर्ष के आधार पाठ्यक्रम अंग्रेजी विषय की परीक्षा आयोजित हुई थी।

बाद में विभाग को जानकारी मिली कि इसी परीक्षा का प्रश्नपत्र 5 अप्रैल 2026 को ही एक यूट्यूब चैनल पर अपलोड कर दिया गया था। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र सार्वजनिक होने की सूचना मिलने के बाद अतिरिक्त संचालक ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की थी।

जांच में क्या सामने आया

जांच समिति ने अपने प्रतिवेदन में पाया कि संबंधित अंग्रेजी विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही यूट्यूब पर उपलब्ध था। जांच के दौरान समिति ने प्रश्नपत्र निर्माण की जिम्मेदारी निभाने वाले सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर सिंह को इसके लिए जिम्मेदार माना। रिपोर्ट के आधार पर उन्हें भविष्य में प्रश्नपत्र निर्माण और परीक्षा मूल्यांकन से संबंधित सभी जिम्मेदारियों से पृथक कर दिया गया है।

एडी रीवा ने क्या कहा

अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा रीवा संभाग डॉ. महेन्द्रमणि द्विवेदी ने बताया कि जांच समिति ने डॉ. प्रभाकर सिंह को प्रश्नपत्र वायरल करने के मामले में दोषी पाया है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर उन्हें प्रश्नपत्र निर्माण और उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन के कार्य से अलग कर दिया गया है। साथ ही पूरी रिपोर्ट आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग भोपाल को भेज दी गई है।

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