सतना के सबसे बड़े सरकारी जिला अस्पताल में सोनोग्राफी की व्यवस्था गंभीर दबाव में है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन पर्याप्त रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध न होने से उन्हें महीनों बाद की तारीख दी जा रही है। वर्तमान स्थिति में कई मरीजों को 15 जनवरी 2027 के बाद की तारीख मिल रही है।
पेट और गांठ के मरीजों को अलग-अलग इंतजार
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, पेट संबंधी सामान्य समस्याओं वाले मरीजों को सितंबर माह की तारीख दी जा रही है, जबकि गांठ, फोड़ा या अन्य जांच वाले कई मरीजों को जनवरी 2027 तक का इंतजार करना पड़ रहा है। इससे समय पर जांच न हो पाने की चिंता भी बढ़ रही है।
5 मशीनें, लेकिन नियमित जांच के लिए सिर्फ एक डॉक्टर
सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल के ओपीडी सोनोग्राफी सेंटर में पांच अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन नियमित जांच के लिए केवल एक रेडियोलॉजिस्ट ही सेवाएं दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हर्षिका सिंह रोजाना सोनोग्राफी कर रही हैं। उनका कहना है कि व्यवस्था को सामान्य करने के लिए कम से कम पांच अतिरिक्त रेडियोलॉजिस्ट की आवश्यकता है।
हर दिन 100 से ज्यादा मरीज, जांच हो पाती है 40–50 की
डॉ. हर्षिका सिंह के अनुसार जिला अस्पताल की ओपीडी और आईपीडी मिलाकर प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज सोनोग्राफी के लिए पहुंचते हैं। सुबह 9 बजे से दोपहर करीब 1:30 बजे तक नियमित जांच के दौरान एक दिन में लगभग 40 से 50 मरीजों की ही सोनोग्राफी हो पाती है।
डॉप्लर (Doppler) जांच में एक मरीज पर 30 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता है, जबकि सामान्य सोनोग्राफी में भी 10 से 15 मिनट लगते हैं। डॉप्लर जांच बढ़ने पर सामान्य मरीजों की संख्या और कम हो जाती है।
गंभीर मरीजों और गर्भवतियों को प्राथमिकता
अस्पताल प्रशासन के अनुसार भर्ती मरीज, गंभीर स्थिति वाले मरीज, 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे तथा गंभीर गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर सोनोग्राफी की सुविधा दी जाती है। इसके बाद तय तारीख वाले मरीजों की जांच की जाती है।
डॉक्टर की छुट्टी तो बंद हो जाती है व्यवस्था
अस्पताल सूत्रों का कहना है कि यदि एकमात्र उपलब्ध रेडियोलॉजिस्ट अवकाश पर रहती हैं तो नियमित ओपीडी सोनोग्राफी सेवा लगभग पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के दो स्वीकृत पद वर्षों से रिक्त बताए जा रहे हैं, जिससे समस्या लगातार बनी हुई है।
सिविल सर्जन ने मानी विशेषज्ञों की कमी
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने बताया कि अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के दोनों स्वीकृत पद रिक्त हैं। इसकी जानकारी कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। उन्होंने माना कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण ही सोनोग्राफी यूनिट पर अतिरिक्त दबाव है।