थाना से गायब हो गए अहम दस्तावेज: वनरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के आरोपी बरी; कोर्ट ने SP को दिए जांच के निर्देश

सतना। वर्ष 2013 की वनरक्षक भर्ती परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जिस प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत में पेश किए जाने थे, वे ही थाना से गायब हो गए। नतीजा यह हुआ कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका और अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। मामले को गंभीर मानते हुए न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक सतना को जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

13 साल पुराने भर्ती घोटाले के मामले में आया फैसला

जानकारी के अनुसार मामला वर्ष 2013 की वनरक्षक भर्ती परीक्षा का है। सिंधु कन्या महाविद्यालय के तत्कालीन केंद्राध्यक्ष एवं प्राचार्य सुभाष चंद्र जैन ने 3 मार्च 2013 को कोलगवां थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि परीक्षा में एक अभ्यर्थी की जगह दूसरा व्यक्ति बैठकर परीक्षा दे रहा था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने सुदीप राय और हेमंत गौतम के खिलाफ भादवि की धारा 419, 468, 120-बी तथा मध्यप्रदेश परीक्षा अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप था कि हेमंत गौतम की जगह सुदीप राय ने परीक्षा दी थी।

अदालत में पेश होने से पहले गायब हो गए दस्तावेज

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने हस्ताक्षर नमूने, लिखावट के नमूने और परीक्षा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य परीक्षक विवादित दस्तावेज कार्यालय भेजे थे। इन्हीं दस्तावेजों को बाद में अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश किया जाना था। लेकिन सुनवाई के दौरान पता चला कि यह महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। दस्तावेजों की तलाश के लिए थाना स्तर पर प्रयास किए गए, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। रिकॉर्ड के अनुसार दस्तावेज वर्ष 2013 में पुलिस कर्मियों के माध्यम से थाने तक पहुंचे थे, लेकिन बाद में उनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

दस्तावेज नहीं मिले, कमजोर पड़ गया अभियोजन

अदालत में सबसे अहम साक्ष्य पेश नहीं हो पाने के कारण अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित नहीं कर सका। इसका सीधा लाभ आरोपियों को मिला और न्यायालय ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

कोर्ट ने जताई नाराजगी

सत्र प्रकरण क्रमांक 67/2020 में सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश सतना श्री मुकेश कुमार यादव ने 17 जून को फैसला सुनाते हुए आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मामले से जुड़े दस्तावेजों के गायब होने की जांच की जाए और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक सतना को निर्देशित किया है कि दस्तावेजों के गुम होने के पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में जांच की लापरवाही या साक्ष्यों के संरक्षण में हुई चूक का लाभ किसी आरोपी को न मिल सके।

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