सतना-मैहर में बारिश से बाढ़ जैसे हालात, चित्रकूट में मंदाकिनी उफान पर

सतना। डिजिटल डेस्क

लगातार बारिश के कारण सतना और मैहर जिलों के कई हिस्सों में नदी-नाले उफान पर हैं। जलभराव के चलते कई रास्तों पर आवागमन प्रभावित हुआ है और निचले इलाकों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। रामघाट, लंका तिराहा और कामदगिरि मार्ग के आसपास पानी फैलने से जनजीवन प्रभावित हुआ। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक कई दुकानों और घरों में पानी पहुंचा है।

रामघाट और आसपास के इलाकों में पानी

मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने के बाद आरोग्यधाम मार्ग पर बैरिकेडिंग कर आवागमन रोका गया। गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं और आसपास की दुकानों को भी बंद किया गया।

भरतघाट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश थमने के बाद जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार कुछ कम हुई, लेकिन आसपास के जंगलों और ऊपरी क्षेत्रों से पानी आने के कारण प्रशासन की निगरानी जारी है।

मझगवां-जैतवारा में कई रास्ते जलमग्न

सतना जिले के मझगवां क्षेत्र में पिंडरा नदी का पानी नदी किनारे बसे घरों तक पहुंच गया। मझगवां-पटना, पटनी और पहाड़ीखेड़ा मार्ग पर चकरा नाला का रपटा डूब गया।

मझगवां-मानिकपुर मार्ग पर बभियां का रपटा भी जलमग्न बताया गया है। जैतवारा क्षेत्र में तुर्री और नदना नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ।

मुकुंदपुर में घरों तक पहुंचा पानी

मैहर जिले के ताला-मुकुंदपुर क्षेत्र में गऊघाट और मुर्जुआ नदी का पानी पुलों के ऊपर पहुंच गया। इसके चलते अमरपाटन-मुकुंदपुर और बेला-गोविंदगढ़ मार्ग प्रभावित हुए।

ताला क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क प्रभावित होने की सूचना है। मुकुंदपुर में घरों में पानी पहुंचने के बाद कुछ परिवारों को सामान और अनाज लेकर ऊंचे स्थानों की ओर जाना पड़ा।

लामीकरही में पांच फीट तक जलभराव

रामपुर बघेलान के रीवा रोड किनारे स्थित लामीकरही बस्ती में भी जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई। कई घरों में करीब पांच फीट तक पानी भरने की बात सामने आई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी नाले और जमीन पर कथित अतिक्रमण के कारण पानी की निकासी बाधित हुई है। उनका कहना है कि पिछले साल भी जलभराव के कारण मकानों को नुकसान पहुंचा था।

जलभराव से नाराज ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगाया और अतिक्रमण हटाने के साथ स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग की।

प्रशासन ने खोला अस्थायी आश्रय स्थल

चित्रकूट नगर परिषद ने प्रमोद वन सामुदायिक भवन में करीब 70 लोगों की क्षमता वाला अस्थायी आश्रय स्थल शुरू किया है। यहां प्रभावित लोगों के लिए निःशुल्क ठहरने के साथ नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की गई है।

प्रशासनिक अमला प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रख रहा है। लोगों से उफनती नदियों-नालों और जलमग्न रास्तों से दूर रहने की अपील की गई है।

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