देशभर में पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलनों के बीच केंद्र सरकार को बड़ी विधायी सफलता मिली है। लोकसभा ने बुधवार को हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत (Voice Vote) से पारित कर दिया। दिया। सरकार ने इसे प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक माफिया पर शिकंजा कसने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान
संशोधन विधेयक में मौजूदा 2024 के कानून को और सख्त बनाया गया है। प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं—
- पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में कड़ी सजा।
- जांच को तय समय-सीमा में पूरा करने का प्रावधान।
- मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था।
- विशेष लोक अभियोजकों (Special Public Prosecutors) की नियुक्ति।
- अपीलों के समयबद्ध निपटारे की व्यवस्था।
- संगठित गिरोहों और संस्थाओं पर भारी आर्थिक दंड तथा कठोर दंडात्मक कार्रवाई।
सरकार ने क्यों लाया यह संशोधन
सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा कमजोर किया है। इसी कारण 2024 के कानून को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन लाया गया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया तेज हो तथा परीक्षा माफिया के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई हो सके।
सदन में सरकार और विपक्ष आमने-सामने
विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। विपक्ष ने परीक्षा प्रणाली की विफलताओं और हालिया घटनाओं पर सरकार को घेरा, जबकि सरकार ने कहा कि यह युवाओं के भविष्य की रक्षा और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है।
अब आगे क्या होगा
लोकसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह संशोधन कानून के रूप में लागू होगा।