कान्हा की बुजुर्ग बाघिन T-27 का रेस्क्यू, वन विहार भोपाल भेजी गई

2 अगस्त की मध्य रात्रि में बालाघाट जिले के बैहर थाना क्षेत्र के ग्राम पर्रापुर (स्कूल टोला) में बाघ के हमले में सुगनी बाई (पति बुधराम बैगा) की मौत हो गई थी। घटना के बाद कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाते हुए कैमरा ट्रैप, गश्ती दल और हाथी दल की मदद से व्यापक सर्च अभियान शुरू किया।

गांव के पास मिली 14 वर्षीय टाइग्रेस

सर्च अभियान के दौरान करीब 14 वर्ष आयु की मादा बाघिन T-27 गांव के आसपास विचरण करती मिली। वन विभाग की जांच में सामने आया कि बाघिन पहले भी कई बार ग्रामीण क्षेत्र के समीप देखी जा चुकी थी और घटना से एक रात पहले भी गांव के नजदीक शिकार करने का प्रयास किया था।

घिसे मिले कैनाइन दांत, आसान शिकार की तलाश में थी

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश शासन की अनुमति मिलने के बाद सोमवार को हाथी दल की सहायता से बाघिन का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।

क्षेत्र संचालक रवींद्र मणि त्रिपाठी और उपसंचालक (बफर) अमिता के.बी. के मार्गदर्शन में चले अभियान के दौरान वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल ने बाघिन का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में उसके कैनाइन दांत अत्यधिक घिसे हुए पाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र बढ़ने और दांत घिस जाने के कारण वह जंगल में तेज शिकार नहीं कर पा रही थी, इसलिए आसान शिकार की तलाश में गांवों के आसपास आने लगी थी।

वन विहार भोपाल भेजी गई बाघिन

ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वन विभाग ने बाघिन को विशेष परिवहन वाहन के माध्यम से सुरक्षित रूप से वन विहार, भोपाल भेज दिया। कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि वन्यजीवों की गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें और किसी भी परिस्थिति में स्वयं जोखिम उठाने का प्रयास न करें।

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