रीवा। साइबर ठगों ने सरकारी अधिकारियों के नाम और विभागीय WhatsApp ग्रुप का इस्तेमाल कर ठगी का नया तरीका अपनाया। रीवा में दो ANM इसके जाल में फंस गईं और उनके खातों से 81 हजार रुपए निकल गए। रीवा के सिरमौर में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है। साइबर ठग ने कथित तौर पर खुद को नायब तहसीलदार अशोक मीणा बताते हुए BMO डॉ. आनंद पांडेय को फोन किया।
ठग ने खुद को कलेक्ट्रेट का अधिकारी बताते हुए निर्माण कार्यों से जुड़ी कुछ जानकारी मांगे जाने की बात कही। इसके बाद BMO से कहा गया कि संबंधित कर्मचारियों को इसकी जानकारी देने के लिए विभागीय ग्रुप में मैसेज डाल दें।
BMO ने ठग के कहने पर ग्रुप में मैसेज कर दिया। इसके बाद साइबर ठग ने इसी मैसेज को आधार बनाकर कर्मचारियों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया।
BMO के मैसेज से मिला ठगों को भरोसे का रास्ता
विभागीय ग्रुप में BMO का मैसेज पहुंचने के बाद दो ANM के पास साइबर ठगों के फोन पहुंचे। BMO की ओर से पहले ही जानकारी दिए जाने के कारण दोनों ANM को फोन करने वाला व्यक्ति नायब तहसीलदार ही लगा। इसके बाद उसने निर्माण कार्य और राशि आवंटन से जुड़ी बातें करते हुए उन्हें अपने निर्देशों का पालन करने के लिए कहा। ठग ने कथित तौर पर अधिकारी जैसी भाषा और रौब दिखाकर दोनों को विश्वास में लिया। इसके बाद उनके बैंक खातों से रकम निकल गई।
एक ANM के खाते से 53 हजार, दूसरी से 28 हजार
रंगौली में पदस्थ ANM विश्व मोहिनी नामदेव ने बताया कि 8 अगस्त को उनके पास साइबर ठग का फोन आया था। उन्होंने बताया कि फोन करने वाले ने अधिकारियों के नाम बताए और निर्माण कार्य के लिए राशि आवंटित होने की जानकारी दी। सवाल करने पर कथित ठग ने रौब दिखाया, जिससे वह डर गईं।
इसके बाद कथित तौर पर पहले 10 रुपए भेजे गए। इसके बाद उनके खाते से रुपए कटने का सिलसिला शुरू हो गया और कुल 53 हजार रुपए निकल गए।
इसी तरह बीड़ा में पदस्थ ANM रीता पनिका को भी फोन किया गया। उनके खाते से 28 हजार रुपए निकाले गए। इस तरह दोनों ANM के खातों से कुल 81 हजार रुपए की साइबर ठगी हुई।
थाने में शिकायत, कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिकारियों को बताया मामला
घटना सामने आने के बाद मामले की शिकायत थाने में की गई है। इसके साथ ही सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। मामले में अब साइबर ठगी के तरीके, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की जांच की जा रही है।
सरकारी अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर रहे साइबर ठग
इस मामले में खास बात यह है कि ठग ने सीधे कर्मचारियों से संपर्क करने के बजाय पहले BMO को विश्वास में लिया और उनसे विभागीय ग्रुप में मैसेज करवाया। इसके बाद उसी आधिकारिक मैसेज का सहारा लेकर ANM को फोन किया गया। इससे ठग के लिए कर्मचारियों का भरोसा जीतना आसान हो गया।
यह घटना सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी चेतावनी है कि किसी अधिकारी के नाम से फोन आने पर आर्थिक लेनदेन या बैंक संबंधी निर्देशों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि जरूर की जाए।