सुपाड़ी के नाम पर 2.20 करोड़ की डील, 35 लाख लेकर फरार हुए ठग

सिवनी जिले के एक कारोबारी के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नाम पर करोड़ों रुपये की डील के बहाने बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। बांग्लादेश में सुपाड़ी सप्लाई का झांसा देकर आरोपियों ने पहले भरोसा जीता, फिर 35 लाख रुपये एडवांस लेकर फरार हो गए।

बांग्लादेश के ऑर्डर से शुरू हुई पूरी कहानी

पुलिस के अनुसार, छपारा निवासी वैभव शिवहरे कंस्ट्रक्शन सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामग्री सप्लाई का कारोबार करते हैं। उन्हें बांग्लादेश की कंपनी अभिराज इंटरप्राइजेज से 100 मीट्रिक टन सुपाड़ी सप्लाई का ऑर्डर मिला था।

इसी दौरान 6 जुलाई को उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को महाराष्ट्र के सांगली स्थित श्री बालाजी ट्रेडर्स का संचालक धीरज पाटिल बताया और व्हाट्सएप पर सुपाड़ी के सैंपल की तस्वीरें भेजीं।

2.20 करोड़ की डील, फिर मांगा एडवांस

सैंपल पसंद आने के बाद दोनों पक्षों के बीच 2.20 लाख रुपये प्रति टन की दर से 100 मीट्रिक टन सुपाड़ी का सौदा तय हुआ। कुल डील करीब 2.20 करोड़ रुपये की थी।

आरोपी ने सप्लाई शुरू करने के लिए 20 प्रतिशत अग्रिम राशि मांगी। भरोसा होने पर वैभव शिवहरे ने तीन किश्तों में कुल 35 लाख रुपये बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए।

महाराष्ट्र बुलाकर दिखाया दूसरा माल

19 जुलाई को वैभव शिवहरे महाराष्ट्र के सांगली पहुंचे। वहां धीरज पाटिल और दिलीप पाटिल उन्हें एक गोदाम में ले गए, जहां सुपाड़ी का जो माल दिखाया गया, वह व्हाट्सएप पर भेजे गए सैंपल से पूरी तरह अलग था।

कारोबारी ने खराब गुणवत्ता का हवाला देते हुए माल लेने से इनकार कर दिया और एडवांस राशि वापस मांगी। आरोपियों ने 22 जुलाई तक पैसे लौटाने का भरोसा दिया, लेकिन इसके बाद मोबाइल बंद कर फरार हो गए।

तीन दिन के लिए किराये पर लिया था गोदाम

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिस गोदाम में कारोबारी को ले जाया गया था, उसे आरोपियों ने केवल तीन दिन के लिए किराये पर लिया था।

गोदाम पर श्री बालाजी ट्रेडर्स का बोर्ड और जीएसटी नंबर भी लगाया गया था ताकि सब कुछ असली लगे। बाद में जांच में पता चला कि आरोपियों के नाम से ऐसी कोई फर्म अस्तित्व में नहीं है।

पुलिस के मुताबिक, असली फर्म से मिलते-जुलते नाम और जीएसटी नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी पहचान बनाई गई थी, जबकि बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति का था।

यूपी के खाते में पहुंचा पैसा

जांच में पता चला कि 35 लाख रुपये उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी सिद्धांत सिंह के बैंक खाते में जमा हुए थे। ठगी में इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर भी किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी था।

पुलिस ने सिद्धांत सिंह को आरोपी बनाकर मामला दर्ज किया है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने अन्य राज्यों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं।

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