आदमखोर बाघ PN-103 वन विहार भोपाल में रिलीज, विशेष निगरानी में रखा गया

सिवनी जिले के बरघाट क्षेत्र से रेस्क्यू किए गए बाघ PN-103 को सोमवार सुबह करीब 8 बजे भोपाल के वन विहार में विशेष सेल में छोड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार बाघ को छोड़ने के बाद वह काफी देर तक शांत रहा। वन विहार के पशु चिकित्सकों का कहना है कि कुछ समय में वह नए वातावरण के अनुरूप ढल जाएगा। फिलहाल बाघ को विशेष निगरानी में रखा गया है। उसके स्वास्थ्य और व्यवहार की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके बाद वन विहार प्रबंधन तय करेगा कि भविष्य में उसे किस स्थान पर छोड़ा जाएगा।

एक महीने तक चला सर्च ऑपरेशन

करीब 240 किलो वजनी और 9 वर्षीय इस बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने लगभग एक महीने तक व्यापक अभियान चलाया। बाघ लगातार अपना स्थान बदल रहा था, जिससे उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। रेस्क्यू ऑपरेशन में वैज्ञानिक और तकनीकी संसाधनों का व्यापक उपयोग किया गया। जंगल के विभिन्न हिस्सों में करीब 80 अत्याधुनिक AI कैमरे लगाए गए, जिनकी मदद से बाघ की लगातार ट्रैकिंग की गई।

डीएनए जांच से हुई पहचान की पुष्टि

वन विभाग ने घटनास्थलों से मिले डीएनए नमूनों और AI कैमरों से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर बाघ की पहचान सुनिश्चित की। पूरे अभियान में करीब 60 वन अधिकारी और कर्मचारी लगातार जुटे रहे। रेस्क्यू के दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व से दो और पेंच टाइगर रिजर्व से एक हाथी बुलाया गया, जिनकी मदद से अभियान को सफल बनाया गया।

बरघाट के जंगल में अब भी सात बाघ मौजूद

वन विभाग के अनुसार बरघाट क्षेत्र के जिन जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, वहां अभी भी सात अन्य बाघ मौजूद हैं। इसके अलावा तेंदुए और कई अन्य वन्यजीव भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।

यह अभियान पेंच टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम, बरघाट एवं लामटा परियोजना तथा दक्षिण बालाघाट वन मंडल के संयुक्त प्रयासों से पूरा किया गया। अभियान में बरघाट परियोजना के डीएम रामकिशन सोलंकी, लामटा परियोजना के डीएम एस. निवेदन, पेंच के फील्ड डायरेक्टर देवा प्रसाद जे., डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल, पशु चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा, डॉ. प्रशांत देशमुख सहित विभागीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *