सावन के दूसरे सोमवार को संस्कारधानी जबलपुर पूरी तरह शिवमय नजर आई। प्रसिद्ध संस्कार कांवड़ यात्रा में सुबह से ही ग्वारीघाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा का पूजन-अर्चन किया और कांवड़ में पवित्र जल भरा। इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक करने के संकल्प के साथ यात्रा शुरू हुई। भगवा वस्त्र पहने महिला-पुरुष और युवा कांवड़िए कंधों पर कांवड़ और हाथों में ध्वज लेकर आगे बढ़ते रहे। रास्तेभर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी हुए शामिल
संस्कार कांवड़ यात्रा में मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी शामिल हुए। यात्रा में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का दावा किया गया। कांवड़ियों ने ग्वारीघाट से कैलाश धाम तक करीब 35 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। यात्रा का अंतिम पड़ाव पनागर तहसील के मटामर गांव की पहाड़ी पर स्थित कैलाश धाम रहा।
नर्मदा जल के साथ पौधा लेकर चले श्रद्धालु
संस्कार कांवड़ यात्रा की सबसे खास बात इसमें शामिल पर्यावरण संरक्षण का संदेश रहा। श्रद्धालु कांवड़ के एक छोर पर मां नर्मदा का पवित्र जल और दूसरे छोर पर पौधा लेकर चले। इस तरह धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया गया। यात्रा के समापन के बाद इन पौधों को रोपित करने की पहल की गई। आयोजकों की इस परंपरा ने भक्ति को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का संदेश दिया।
शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी यात्रा
ग्वारीघाट से शुरू हुई कांवड़ यात्रा रामपुर, गोरखपुर, शास्त्री ब्रिज, मालवीय चौक, लॉर्डगंज, बड़ा फुहारा और सराफा चौक से होकर आगे बढ़ी। इसके बाद यात्रा खटीक मोहल्ला, बेलबाग, घमापुर चौक, कांचघर और रांझी होते हुए कैलाश धाम पहुंची। शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। यात्रा के दौरान पूरे मार्ग पर शिवभक्ति का माहौल बना रहा।
जगह-जगह लगाए गए सेवा शिविर
लंबी पदयात्रा को देखते हुए सामाजिक संगठनों और सेवा समितियों ने जगह-जगह सेवा शिविर लगाए। इन शिविरों में कांवड़ियों के लिए पेयजल, फलाहार, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई। स्वयंसेवक भी पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मदद में जुटे रहे।
कैलाश धाम में हुआ भगवान शिव का अभिषेक
करीब 35 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के बाद श्रद्धालु कैलाश धाम पहुंचे। यहां उन्होंने मां नर्मदा से लाए पवित्र जल से भगवान शिव का अभिषेक किया। सावन के पवित्र महीने में आयोजित संस्कार कांवड़ यात्रा ने धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का संदेश दिया।